
शनिवार को दिए गए प्रशिक्षण के बाद पुलिसकर्मी इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) और नेक्स्ट जेन एम-परिवहन ऐप से लैस होंगे। सड़कों पर तैनात जवानों के पास बॉडी वॉर्न कैमरे का एडवांस वर्जन होगा, जिससे किसी भी विवाद की स्थिति में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। पीओएस मशीनों को भी अपडेट किया गया है, ताकि मौके पर ही डिजिटल तरीके से चालान और अन्य कार्रवाई की जा सके।
एसएसपी रजनेश सिंह ने यातायात प्रभारियों और विवेचकों से कहा कि सड़क सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब केवल चालान काटना ही नहीं, बल्कि लोगों में ट्रैफिक सेंस विकसित करना भी पहली प्राथमिकता होगी। इस दौरान ट्रैफिक एडिशनल एसपी रामगोपाल करियारे भी मौजूद रहे।
'ट्रिपल-ई' फॉर्मूले से सुधरेगी यातायात व्यवस्था
एसएसपी ने बताया कि पुलिस 'ट्रिपल-ई' फॉर्मूले पर काम करेगी, जिसमें ट्रैफिक एजुकेशन (शिक्षा), इंजीनियरिंग (अभियांत्रिकी) और एनफोर्समेंट (प्रवर्तन) शामिल हैं। इसके तहत सड़कों की बनावट में खामियों को सुधारा जाएगा, लोगों को यातायात नियमों के प्रति शिक्षित किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जो लोग जानबूझकर यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 'विजिबल पुलिसिंग' के तहत अब संदिग्ध वाहनों की जांच और वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करने वालों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाएगा।
इन सात तरह के उल्लंघनों पर विशेष निगरानी
ट्रैफिक पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शराब पीकर वाहन चलाने वाले, रॉन्ग साइड ड्राइविंग करने वाले और बुलेट में मॉडिफाइड साइलेंसर लगाकर शोर मचाने वालों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। इसके अलावा सिग्नल जंपिंग, बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट वाहन चलाने और मालवाहक वाहनों में सवारी बैठाने वालों के खिलाफ भी जिलेभर में विशेष अभियान चलाया जा रहा है।