अनुभूति बिश्नोई, नई दिल्ली: आंध्र प्रदेश से लेकर पश्चिम बंगाल तक के राज्यों में डेटा सेंटर तेजी से बढ़ रहे हैं जिसने केंद्र सरकार की टेंशन बढ़ा दी है। इसे देखते हुए सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA) ने एक कमेटी बनाई है। यह कमेटी देश के पावर सिस्टम और ग्रिड की स्थिरता पर इन सुविधाओं के असर का आकलन करेगी, क्योंकि ये बहुत ज्यादा बिजली और पानी की खपत करती हैं।इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया कि कमेटी साइबर सुरक्षा से जुड़े संभावित खतरों की भी जांच कर रही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत-पाकिस्तान संघर्ष के समय पावर सेक्टर साइबर हमलों का मुख्य निशाना बना था।डेटा सेंटरों को चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली की जरूरत
जमीनी स्तर पर भी यह चिंता साफ दिख रही है, क्योंकि राज्य आने वाले समय में डेटा सेंटरों को चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली की जरूरत की बात कह रहे हैं। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस कमेटी को बनाने का फैसला तब लिया गया जब ईस्टर्न रीजनल पावर कमेटी ने हाल ही में ओडिशा की चिंताओं को गंभीरता से लिया। ओडिशा ने इंडस्ट्री द्वारा बड़े पैमाने पर सामूहिक बाजार खरीद से पैदा होने वाली ग्रिड-लिंक्ड ऑपरेशनल चुनौतियों के बारे में चिंता जताई थी।
बंगाल और आसपास के इलाकों के डेटा सेंटर्स के लिए 24x7 लोड की जरूरत होगी
जून में CEA की ट्रांसमिशन पर बनी नेशनल कमिटी की बैठक में, सेंट्रल ट्रांसमिशन यूटिलिटी ऑफ इंडिया (CTUIL) ने बताया कि पश्चिम बंगाल, न्यू टाउन और राजारहाट और उसके आस-पास के इलाकों में डेटा सेंटर्स के लिए 200-300 MVA (मेगावोल्ट-एम्पीयर) के काफी बड़े लोड का अनुमान लगा रहा है, जिसमें आने वाले सालों में 24x7 लोड की जरूरत होगी। अगस्त में जारी सरकारी बयान के मुताबिक, देश में डेटा-सेंटर की बिजली क्षमता 2020 में 375 MW से बढ़कर 1,575 MW हो गई है। CEA को उम्मीद है कि 2031-32 तक डेटा सेंटर्स से बिजली की मांग लगभग 17 GW तक पहुंच जाएगी।मुंबई, चेन्नई समेत 7 शहरों में सबसे अधिक डेटा सेंटर
अभी, डेटा सेंटर ज्यादातर मुंबई, नवी मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु, दिल्ली NCR और जामनगर में हैं, लेकिन तेजी से दूसरे राज्यों में भी फैल रहे हैं। इकोनॉमिक टाइम्स को मिली जानकारी के मुताबिक, हाल ही में बनी एक कमेटी बड़े डेटा सेंटरों के कामकाज, पॉलिसी और रेगुलेटरी पहलुओं की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट CEA की नेशनल पावर कमेटी ( NPC ) को सौंपेगी।
इस कमेटी में नेशनल लोड डिस्पैच सेंटर (NLDC), टेक इंडस्ट्री बॉडी नैसकॉम (Nasscom) और CTUIL जैसे अलग-अलग स्टेकहोल्डर ग्रुप्स के प्रतिनिधि शामिल हैं और इसकी कई बैठकें हो चुकी हैं। ग्रिड कंट्रोलर ऑफ़ इंडिया (Grid-India) ने इस पर एक टेक्निकल नोट भी सौंपा है।फरवरी की बैठक में हुई थी चर्चा
NPC ने फरवरी में हुई अपनी बैठक में इस पर चर्चा की थी। सदस्यों ने देखा कि डेटा सेंटरों में आम तौर पर लगातार ज़्यादा बिजली की खपत होती है, जिसमें ग्लोबल टाइम ज़ोन के हिसाब से उतार-चढ़ाव आते हैं और इससे "ग्रिड के कामकाज पर असर पड़ सकता है।
यह महसूस किया गया कि डेटा सेंटरों में बिजली की खपत के पैटर्न, ग्रिड की स्थिरता पर उनके असर और क्या उन्हें अलग कैटेगरी में रखने या अलग रेगुलेटरी नियम लागू करने की ज़रूरत है, इन सब बातों को समझने के लिए एक स्टडी की जानी चाहिए।