ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, 2027 विधानसभा चुनाव से पहले आयोग को मिटानी होगी वोटर्स के मन की शंका

Updated on 29-09-2026 12:06 PM
पूनम पाण्डे: स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन ( SIR ) से शुरू हुई बहस अब उस जगह पहुंच गई है, जहां मामला सिर्फ वोटर लिस्ट का नहीं बल्कि चुनावी संस्थाओं पर भरोसे का भी है। चुनाव आयोग पर सवाल उठना इसलिए गंभीर है क्योंकि सरकार बदलती है, नेता बदलते हैं, सत्ता पक्ष विपक्ष बनता है और विपक्ष सत्ता में आता है, लेकिन चुनाव आयोग इस पूरी राजनीति और लोकतंत्र का वह आधार है, जिसमें मामूली दरार भी घातक हो सकती है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद अब SIR ही नहीं, वोटर लिस्ट और पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी अंगुली उठाई जा रही है। कांग्रेस 25 सितंबर को देश के कई हिस्सों में सड़कों पर उतरी। मांग थी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की। विपक्ष के कई दलों ने भी आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की है।

जानकारी जनता का अधिकार

किसी संस्था में असहमति होना अपने आप में संस्था के कमजोर होने का प्रमाण नहीं। लेकिन, अगर तीन सदस्यीय संवैधानिक संस्था के दो सदस्य किसी भी मसले पर बार-बार लिखित आपत्ति दर्ज करते हैं, तो जनता को यह जानने का अधिकार है कि उन आपत्तियों पर क्या विचार हुआ? उन्हें स्वीकार किया गया या खारिज? भले ही आयोग कहे कि फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। आयोग का काम सिर्फ चुनाव कराना नहीं, प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखना भी है।

पारदर्शिता से बनेगी बात

SIR जैसे बड़ी एक्सरसाइज में पारदर्शिता इसलिए और जरूरी हो जाती है क्योंकि इसका सीधा संबंध नागरिकों के सबसे बुनियादी राजनीतिक अधिकार से है। इसीलिए चुनाव आयोग को अपने खिलाफ लगे गए हर आरोप का जवाब सिर्फ राजनीतिक बयान के रूप में नहीं, डेटा और दस्तावेजों के साथ देना चाहिए। जितनी ज्यादा जानकारी सार्वजनिक होगी, उतनी कम जगह संदेह के लिए बचेगी।
इस पूरे विवाद को 2027 की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों की राजनीति से अलग करके भी नहीं देखा जा सकता। उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव में कुछ ही वक्त बचा है। इस मामले का आने वाले चुनावों में राजनीतिक मुद्दा बनना स्वाभाविक है। विपक्ष इसे चुनावी निष्पक्षता का सवाल बना रहा है। BJP और उसके समर्थक इसे विपक्ष की ऐसी राजनीति के रूप में देख रहे हैं, जिसमें संभावित हार के लिए पहले से चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। लेकिन, इन नैरेटिव की बजाय सबसे अहम सवाल वोटर्स का है।

चुनाव आयोग को करना होगा शंका का समाधान

अगर वोटर्स के मन में शंका उठती है कि क्या उनका वोट सुरक्षित है, तो इसका समाधान चुनाव आयोग को करना ही होगा। चुनाव में जीत-हार दोनों ही पहलू हैं। जीतने वाले का चुनावी प्रक्रिया में जितना भरोसा होता है, उतना ही हारने वाले का भी होना चाहिए। SIR को वोटर के नजरिए से देखा जाए। एक भी वोटर का नाम अगर प्रक्रिया की गड़बड़ी से कटता है तो यह लोकतंत्र के लिए बिल्कुल सही नहीं है। वोटर को अपने इस लोकतांत्रिक अधिकार के लिए परेशान न होना पड़े, यह सुनिश्चित करना भी आयोग की जिम्मेदारी है।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 30 September 2026
नई दिल्ली: विपक्षी गठबंधन 'इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस' (INDIA) के प्रमुख नेता आज दिल्ली में बड़ी बैठक कर रहे हैं। इसमें निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ संयुक्त अभियान…
 30 September 2026
नई दिल्ली: पाकिस्तान की ओर से एयरस्पेस बंद होने की वजह से भारत ने अब उसी के दोस्त यानी चीन से बातचीत कर रास्ता निकालने की कोशिश तेज कर दी…
 30 September 2026
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मुकदमे की सुनवाई शुरू होने और उसके जल्द पूरा होने की संभावना न हो तो ट्रायल से पहले की हिरासत को सजा…
 30 September 2026
अनुभूति बिश्नोई, नई दिल्ली: आंध्र प्रदेश से लेकर पश्चिम बंगाल तक के राज्यों में डेटा सेंटर तेजी से बढ़ रहे हैं जिसने केंद्र सरकार की टेंशन बढ़ा दी है। इसे…
 30 September 2026
नई दिल्ली: इंतजार करिए और उत्तर प्रदेश का चुनाव खत्म होने दीजिए, आपको अपने सभी सवालों के जवाब मिल जाएंगे। ये शब्द थे कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय…
 30 September 2026
नई दिल्ली: एफसीआरए यानी 'फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल' में संपत्ति सौंपने का प्रावधान सबसे ज्यादा विवादित है। हालांकि, कानून मंत्रालय का कहना है कि यह प्रस्ताव असल में मौजूदा…
 30 September 2026
नई दिल्ली: कांग्रेस की कार्य समिति (CWC) की मंगलवार को हुई बैठक में पार्टी ने कथित वोट चोरी के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन चलाने का संकल्प लिया। बैठक में पारित प्रस्ताव…
 29 September 2026
सचिन पाराशर/सिद्धार्थन,नई दिल्ली: भारत में यूरोपीय संघ (EU) के नए राजदूत जीन-एरिक पैकेट ने भारत-रूस की नजदीकी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने संकेत दिया कि मॉस्को के साथ…
 29 September 2026
पूनम पाण्डे: स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन ( SIR ) से शुरू हुई बहस अब उस जगह पहुंच गई है, जहां मामला सिर्फ वोटर लिस्ट का नहीं बल्कि चुनावी संस्थाओं पर भरोसे…
Advt.