
( प्रमिल अग्रवाल )
हरदा/टिमरनी। कहते हैं नेता भाषण देता है, अभिभावक बचाता है... लेकिन टिमरनी विधायक अभिजीत शाह ने आज साबित कर दिया कि असली जनप्रतिनिधि कैसा होता है।
टिमरनी के *प्राथमिक शाला खुदिया* में शुक्रवार को वो हुआ जिसकी कल्पना से ही रूह कांप जाए। स्कूल की रसोई में भीषण आग भड़क गई। अंदर 265 मासूम बच्चे क्लास में बैठे थे और रसोई में रखा गैस सिलेंडर आग की लपटों में घिरा, धूं-धूं कर जल रहा था। एक चिंगारी और... पूरा स्कूल बारूद बन जाता।
*मौत का सिलेंडर और अटकी सांसें*
आग इतनी तेज थी कि टीचर और ग्रामीण भी पास जाने से डर रहे थे। सिलेंडर लाल अंगारा बन चुका था। बस फटने ही वाला था। पूरे गांव की सांसें थम गई थीं। 265 घरों के चिरागों पर मौत मंडरा रही थी।
*तभी एंट्री हुई टिमरनी के बाजीराव की*
खबर मिलते ही विधायक अभिजीत शाह मौके पर पहुंचे। किसी ने कहा फायर ब्रिगेड को बुलाते हैं, किसी ने कहा पुलिस को। लेकिन शाह ने एक सेकंड नहीं सोचा।
कुर्ते की बाजू चढ़ाई, मुंह पर गमछा लपेटा और सीधे आग के समंदर में कूद गए।
घने धुएं, जलती लपटों के बीच से उन्होंने अकेले अपने कंधे पर उस जलते हुए मौत के सिलेंडर को खींचकर बाहर फेंका। सिलेंडर बाहर आते ही भीषण विस्फोट का खतरा टल गया और फिर ग्रामीणों ने आग पर काबू पा लिया।
*विधायक ने कहा -*
"उस समय अपनी जान का ख्याल नहीं आया। आंखों के सामने सिर्फ 265 मासूम बच्चे थे। मन में एक ही बात थी - किसी भी बच्चे को आंच नहीं आनी चाहिए।"
आज टिमरनी ही नहीं, पूरे हरदा जिले में एक ही चर्चा है - *नेता हो तो अभिजीत शाह जैसा!* जिसने कुर्सी नहीं, बच्चों की जान बचाने के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी।
प्राथमिक शाला खुदिया के शिक्षकों और बच्चों के परिजनों ने विधायक को देवदूत बताते हुए उनका आभार माना है।