'शरीयत से टकराने वाला कानून स्वीकार नहीं':भोपाल में मुफ्ती गुफरान बोले-UCC समर्थकों को चीफ गेस्ट बनाना कैसे उचित

Updated on 22-08-2026 11:42 AM
भोपाल, भोपाल के मंगलवार चौराहा स्थित रुस्तम हम्माल मस्जिद में तकरीर के दौरान मुफ्ती मोहम्मद गुफरान खान नदवी ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई भी कानून, जो कुरान और शरीयत के प्रावधानों से टकराता है, उसे मुसलमान स्वीकार नहीं कर सकता।

तकरीर में उन्होंने शहर काजी, शहर मुफ्ती और मसाजिद कमेटी व औकाफ से जुड़े जिम्मेदार लोगों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को शरीयत से जुड़े मामलों में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यूसीसी का समर्थन करने वालों के साथ खड़े होने पर जवाब देना चाहिए।

मुफ्ती गुफरान ने कहा कि मुसलमानों ने देश के संविधान और आपराधिक कानूनों को स्वीकार किया है, लेकिन व्यक्तिगत कानून और धार्मिक मामलों में शरीयत के प्रावधानों से टकराव होने पर स्थिति अलग है। उन्होंने कहा कि संविधान ने धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार दिया है और इसी आधार पर मुसलमान अपने धार्मिक मामलों में शरीयत का पालन करने की अपेक्षा रखते हैं।

मुफ्ती गुफरान बोले- शरीयत से टकराने वाला कानून स्वीकार नहीं

मुफ्ती मोहम्मद गुफरान खान ने कहा कि यूसीसी के तहत निकाह, तलाक और विरासत जैसे व्यक्तिगत कानूनों पर यदि ऐसे प्रावधान लागू होते हैं, जो शरीयत के विपरीत हैं, तो उन्हें स्वीकार करना धार्मिक रूप से उचित नहीं होगा। तकरीर में उन्होंने बहुविवाह, विरासत में हिस्सेदारी और कजिन मैरिज से जुड़े प्रावधानों का जिक्र करते हुए कहा कि जिन रिश्तों और अधिकारों को इस्लाम ने जायज ठहराया है, उन्हें कोई नया कानून प्रतिबंधित नहीं कर सकता।

मुफ्ती गुफरान ने कहा कि आपराधिक कानूनों को लेकर मुस्लिम समाज ने देश की व्यवस्था को स्वीकार किया है। हालांकि, उन्होंने शरीयत में अपराधों के लिए निर्धारित सजाओं का हवाला देते हुए मौजूदा कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावशाली और गरीब लोगों के लिए कानून का व्यवहार अलग-अलग दिखाई देता है।

शहर काजी की चुप्पी पर भी सवाल

तकरीर का एक बड़ा हिस्सा शहर काजी और मुस्लिम समाज के अन्य धार्मिक जिम्मेदारों की भूमिका को लेकर रहा। मुफ्ती गुफरान ने कहा कि शहर काजी का काम कुरान और हदीस की रोशनी में मार्गदर्शन करना है। ऐसे में यदि किसी मुद्दे पर शरीयत और सरकारी कानून के बीच टकराव की स्थिति बनती है तो शहर काजी को अपनी बात स्पष्ट रूप से रखनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि शहर काजी की चुप्पी उन्हें स्वीकार नहीं है। उनके मुताबिक, शहर काजी मुस्लिम समाज के प्रतिनिधि हैं और उन्हें यूसीसी को लेकर खुलकर अपना पक्ष रखना चाहिए। उन्होंने तकरीर में कहा कि यदि कोई कानून कुरान के प्रावधानों से टकराता है तो उसकी खुलकर मुखालफत की जानी चाहिए।

‘यूसीसी समर्थकों को चीफ गेस्ट बनाना कैसे उचित?’

मुफ्ती गुफरान ने मुस्लिम समाज के कुछ जिम्मेदार लोगों द्वारा यूसीसी का समर्थन करने वाले नेताओं से मेल-जोल रखने, उन्हें कार्यक्रमों में आमंत्रित करने और उनके प्रति समर्थन जताने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति ऐसे कानून का समर्थन करता है, जिसे वक्ता शरीयत के खिलाफ मानते हैं, तो धार्मिक संस्थाओं के जिम्मेदारों द्वारा ऐसे लोगों को सम्मानित करना या उनके साथ मंच साझा करना सवाल खड़े करता है।

उन्होंने मसाजिद कमेटी और औकाफ से जुड़े जिम्मेदारों का नाम लिए बिना कहा कि वे ऐसे लोगों को कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि बना रहे हैं और उनके लिए दुआएं कर रहे हैं, जबकि उन्हीं लोगों की नीतियों को वे शरीयत के खिलाफ मानते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया के संबंध और व्यक्तिगत ताल्लुक अपनी जगह हैं, लेकिन शरीयत से जुड़े मामलों में समझौता नहीं किया जा सकता।

मुफ्ती गुफरान ने कहा- डर किस बात का है, खुलकर बोलिए

तकरीर में मुफ्ती गुफरान ने धार्मिक संस्थाओं के जिम्मेदारों से सवाल करते हुए कहा कि उन्हें किस बात का डर है। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि किसी को पद, वेतन या दूसरे दुनियावी लाभ जाने का डर है तो ऐसे लाभों को प्राथमिकता नहीं दी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि धार्मिक मामलों में जिम्मेदार लोगों को बेबाकी से अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने कुरान की आयतों का हवाला देते हुए कहा कि गलत काम में किसी का सहयोग नहीं किया जाना चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति ऐसे कानून या फैसलों का समर्थन कर रहा है, जिन्हें वह शरीयत के खिलाफ मानते हैं, तो मुस्लिम समाज के जिम्मेदार लोगों को उससे सवाल करना चाहिए।


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