भोपाल। मध्यप्रदेश के लोक निर्माण विभाग में ‘पड़ोसी धर्म’ का नया अध्याय लिखा जा रहा है। PWD के प्रमुख अभियंता यानी ईएनसी के.पी.एस. राणा अपने गृह ग्राम पेतपुरा, टीकमगढ़ के पड़ोसी ठेकेदार प्रदीप राय को अपने मातहतों के जरिए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियम विरूद्ध करोड़ों रुपए के ठेके दिलवा कर सरकारी खजाना लुटा रहे हैं।
मिनी को मोटर बनाओ, 18% को 28% दिखाओ
छतरपुर कांट्रेक्टर एसोसिएशन के मुताबिक ईएनसी राणा की मेहरबानी से उनके बाल सखा मेसर्स गिर्राज कंस्ट्रक्शन/गिर्राज इन्फ्रास्ट्रक्चर के मालिक प्रदीप राय को पिछले 7 महीने में 25 करोड़ से ज्यादा के टेंडर ‘नियम ताक पर रखकर’ दिए जा चुके हैं।
सबसे मसालेदार मामला *टेंडर आईडी 2025-PWDRB-4516-1* का है – छतरपुर से रजपुरा-पाथापुर मार्ग, 5.27 करोड़ का काम। इसके लिए बुलाए गए टैंडर में शर्त थी कि ठेकेदार के पास खुद की जेसीबी, टैंडम रोलर और मोटर ग्रेडर होना चाहिए।
एसोसिएशन का आरोप है कि गिर्राज कंपनी के पास न टैंडम रोलर था, न मोटर ग्रेडर। लेकिन कंपनी के मालिक और ईएनसी के पड़ोसी दोस्त प्रदीप राय ने इनको खरीदने का *रियान इन्फ्रासोल्यूशन का फर्जी बिल* लगा दिया। लेकिन इसमें वे बड़ी ग़लती कर गए। दरअसल टैंडम रोलर पर GST 18% लगती है, पर फर्जी बिल में 28% ठोक दी। इसके चलते कांट्रेक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष आदित्य प्रताप सिंह ने तहकीकात की तो इसके बिल का इनवॉइस नंबर 112517 भी फर्जी निकला। उन्हें रियान कंपनी ने खुद लिखकर दिया कि उन्होंने गिर्राज कंपनी को कोई टैंडम रोलर बेचा ही नहीं है।
मोटर ग्रेडर का जुगाड़ और कड़क है। निविदा में *RTO नंबर MP 16DA0382* डाला, जो RTO रिकॉर्ड में *मिनी ग्रेडर BS-III* का है। कंपनी के इनवॉइस में भी मॉडल *S-3218 मिनी ग्रेडर* लिखा है। साफ है कि टैंडर की शर्त में मोटर ग्रेडर मांगो, कागज में मिनी ग्रेडर दो, और टेंडर ले लो । यह ‘PWD का नया जुगाड़ फॉर्मूला’ है।
*शिकायत की जांच आरोपी से ही करवा दी!*
एसोसिएशन का आरोप है कि अन्य पात्र कंपनियों को ‘तकनीकी कमी’ बताकर बाहर कर दिया गया, पर फर्जी कागज वाली गिर्राज कंपनी को टेंडर मिल गया। उन्होंने सबूत समेत ENC राणा को शिकायत दी, पर कार्रवाई तो दूर – राणा ने जांच उसी सागर CE सी.पी. सिंह को सौंप दी, *जिसने खुद टेंडर की सिफारिश की थी*। यानी ‘चोर की दाढ़ी में तिनका और जांच भी चोर ही करे’।
*‘ऊपर से नीचे तक सेटिंग’*
टेंडर छतरपुर में पदस्थ भारती और सागर CE सी.पी. सिंह ने रिलीज किया, पर ‘परदे के पीछे से ENC राणा ने सारा खेल खेला ’। क्योंकि राणा और ठेकेदार प्रदीप राय टीकमगढ़ के पेतपुरा में ना केवल पड़ोसी हैं बल्कि दोनों में गहरी मित्रता भी है।
*एसोसिएशन की 5 मांगें*
छतरपुर कांट्रेक्टर एसोसिएशन की मांग है कि
1. पूरे खेल की निष्पक्ष जांच हो।
2. ENC राणा, ठेकेदार प्रदीप राय और दोषी अफसरों पर *भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम व IPC 420, 467, 468, 471, 120B* में FIR हो।
3. सबकी संपत्ति, बैंक खाते, कॉल डिटेल खंगाली जाए।
4. जांच तक राणा को ENC पद से हटाया जाए।
5. ईएनसी और ठेकेदार की मिलीभगत से शासन को हुई करोड़ों रुपए की क्षति वसूली जाए।
अपनी शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने से नाराज़ एसोसिएशन अब इस मामले को लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू
को सौंपने की तैयारी कर रही है। एसोसिएशन के पास 7 दस्तावेजी सबूत मौजूद हैं । इनमें फर्जी बिल से लेकर RTO रिकॉर्ड तक शामिल है। अब देखना है कि इसमें लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू की तलवार चलती है या धनबल के चलते शिकायत की फाइल के ठंडे बस्ते में दम तोड़ देती है।
PWD में चर्चा है: _“सड़कें गड्ढों में हैं, पर सेटिंग में कोई गड्ढा नहीं।”_ जनता पूछ रही है – जब ‘मिनी’ को ‘मोटर’ बताकर 5 करोड़ निकल सकता है, तो 25 करोड़ का हिसाब कौन देगा?