एमपी में विधानसभा प्रक्रिया में बड़े सुधार की तैयारी, अब सदन में रखने से पहले ही विधेयकों पर विधायकों को दी जाएगी पूरी जानकारी

Updated on 05-09-2026 12:49 PM
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी), श्रम संहिता सहित अन्य कई महत्वपूर्ण विधेयक बिना चर्चा ध्वनिमत से पारित हो गए। कांग्रेस के सदस्य यूसीसी के प्रविधानों का विरोध तो करते रहे लेकिन जब सदन में बात रखने का अवसर आया तो हंगामा किया।

ऐसा किसी एक विधेयक के साथ नहीं अधिकतर मामलों में होता है। बिना चर्चा ही ध्वनिमत से विधेयक पारित होकर कानून बन रहे हैं। जबकि, इन्हें लाने के पीछे सरकार का एक उद्देश्य होता है लेकिन न तो सदस्यों को इसकी जानकारी होती है और न ही आमजन तक बात पहुंच पाती है।

विधायकों को अलग से इसकी जानकारी दे दी जाएगी

यह प्रवृत्ति अच्छी नहीं है इसलिए तय किया गया है कि अब सदन में विधेयक प्रस्तुत किए जाने से पहले ही विधायकों को अलग से इसकी जानकारी दे दी जाएगी। यदि हंगामे या विरोध के कारण सदन में इस पर चर्चा नहीं भी हो पाती है तो इतना तो तय रहेगा कि हर विधायक को इससे संबंधित महत्वपूर्ण बातें पता होंगी।

लोकसभा अध्यक्ष ने इस प्रवृत्ति पर चिंता जताई थी

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा संसदीय प्रणालियों की समीक्षा के लिए गठित पीठासीन अधिकारियों की समिति की जुलाई में हुई बैठक में भी इस प्रवृत्ति पर चिंता जताई गई थी। समिति ने अनुशंसा भी की है कि सदस्यों को विधेयक की जानकारी देने के लिए विधानसभा में विधेयक पर चर्चा होने से पहले उसके उद्देश्य आदि पर प्रेजेंटेशन होना चाहिए।

इस दौरान विभाग के अधिकारी उन्हें विधेयक के उद्देश्य और इसके प्रविधानों के बारे में बताएंगे। विधायक सवाल-जवाब कर सकेंगे। इस अनुशंसा पर सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है। समिति के सभापति मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर थे, इसलिए इसे लागू करने की पहल भी मध्य प्रदेश से की जाएगी।

जल्दबाजी में पारित होने वाले विधेयकों को रोका जा सकेगा

समिति के सम्मेलन में विधानसभा अध्यक्षों ने कहा था कि काफी प्रयास करने के बाद भी जब सदन में स्थिति सामान्य नहीं होती है तो फिर कार्यवाही आगे बढ़ानी पड़ती है और ध्वनिमत से विधेयक पारित हो जाते हैं। समिति ने मत व्यक्त किया कि कार्य संचालन प्रक्रिया नियमों में संशोधन कर महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन समिति या प्रवर समिति गठित कर संदर्भित किया जाना उचित होगा।

इनके लिए निश्चित समय सीमा में प्रतिवेदन प्रस्तुत करना भी अनिवार्य किया जाएगा। इससे जल्दबाजी में पारित होने वाले विधेयकों को रोका जा सकेगा।



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