
( प्रमिल अग्रवाल )
हरदा । हरदा जिले में खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि विभाग की लापरवाही और मिलीभगत से शासन को करोड़ों के राजस्व का चूना लग रहा है, जबकि रेत व्यापारी और ट्रैक्टर मालिकों का जीना मुहाल हो गया है। ताजा मामला टिमरनी विकासखंड की प्रतिबंधित बघवाड रेत खदान से जुड़ा है, जहाँ 20 जून को जिला खनिज अधिकारी चैन सिंह डामोर की कार्रवाई ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी।
हैरानी की बात ये है कि हरदा जिले में फिलहाल एक भी रेत खदान चालू नहीं है। पूरे जिले में उत्खनन-परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा है। इसके बावजूद नर्मदापुरम की एक रेत कंपनी के कर्मचारी छिदगांव-बघवाड क्षेत्र में बैठकर धड़ल्ले से रॉयल्टी काट रहे हैं। आरोप है कि ये रॉयल्टी दूसरे जिले के नाम पर काटी जा रही है।
मजबूरी में स्थानीय रेत व्यापारी गंजाल नदी से रेत भरकर खदान के ऊपर रोड पर लाते हैं, जहाँ कंपनी के लोग रॉयल्टी काटते हैं। यानी ‘अवैध को वैध’ बनाने का खुला खेल चल रहा है।
20 जून को बघवाड गंजाल नदी से रेत भरकर 3 ट्रैक्टर-ट्रॉली आ रही थीं। दो की रॉयल्टी कट चुकी थी, तीसरी को DMO चैन सिंह डामोर ने नदी घाट पर ही पकड़ लिया। आरोप है कि DMO ने रॉयल्टी वाली दोनों ट्रॉलियों को भी थाने में जब्त करा दिया।
इसी दौरान ट्रैक्टर मालिक सुनील विश्वकर्मा से विवाद हुआ। DMO ने थाने में FIR कराई कि सुनील ने शासकीय कार्य में बाधा डाली, जान से मारने की धमकी दी और गाली-गलौज की।
सुनील विश्वकर्मा ने मीडिया को बताया, “वहाँ कोई गाली-गलौज, धमकी नहीं हुई। वायरल वीडियो में भी साफ है। मैंने पहले भी अवैध उत्खनन की शिकायत 181 और वरिष्ठ अफसरों से की थी। DMO ने दबाव डालकर सारी शिकायतें वापस करवा लीं।”
सुनील का आरोप है, “मैं रॉयल्टी से गाड़ी चलाता हूँ, पर मुझे समय पर रॉयल्टी नहीं दी जाती। प्लानिंग कर सिर्फ मेरी गाड़ी 4 महीने में 3 बार जब्त की गई, जबकि 60-70 ट्रैक्टर अवैध चल रहे हैं। ड्राइवर ने कहा ऊपर रॉयल्टी कटेगी, तो DMO बोले- ‘बार-बार शिकायत करता है, अब फँसाता हूँ’। वीडियो बनाने पर मोबाइल छीन लिया। ग्रामीणों से पूछ लो, मैंने कुछ गलत नहीं किया।”
1. *प्रतिबंधित खदान में रॉयल्टी कौन काट रहा?* अगर खदान बंद है तो नर्मदापुरम की कंपनी के कर्मचारी वहाँ कर क्या रहे हैं?
2. *रॉयल्टी वाली गाड़ी जब्त क्यों?* जिन 2 ट्रॉलियों की रॉयल्टी थी, उन्हें किस नियम के तहत जब्त किया गया? ओवरलोड का केस बनाया तो रॉयल्टी मौके पर ही क्यों काटी गई?
3. *सिर्फ शिकायतकर्ता पर कार्रवाई क्यों?* 60-70 अवैध ट्रैक्टरों को छोड़कर सिर्फ सुनील पर ही कार्रवाई क्यों?
4. *कंपनी के गुर्गों पर चुप्पी क्यों?* अवैध रूप से रॉयल्टी काट रहे कंपनी कर्मचारियों पर DMO ने केस क्यों नहीं बनाया?
सुनील ने थाने और वरिष्ठ अफसरों को शिकायत दी है कि DMO उसे मानसिक-आर्थिक रूप से प्रताड़ित कर झूठे केस में फँसा रहे हैं। उसका कहना है कि शिकायत वापस करवाने के बाद अब उसे टारगेट किया जा रहा है।
DMO चैन सिंह डामोर ने मीडिया के सामने कहा कि ट्रैक्टर मालिक ने शासकीय कार्य में बाधा डाली, इसलिए FIR कराई गई। बाकी आरोपों पर विभाग ने आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि खनिज विभाग और रेत कंपनी की मिलीभगत से एक तरफ शासन को करोड़ों का नुकसान हो रहा है, दूसरी तरफ वैध काम करने वाले व्यापारी परेशान हैं। अब देखना ये है कि वरिष्ठ अधिकारी इस ‘रेत के खेल’ की जांच करते हैं या फाइलों में दबा देते हैं।