( संजय रायजादा )
भोपाल। मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग में ट्रांसफर के आदेश कागज तक ही सीमित रह गए हैं। मामला भोपाल से सागर PWD विद्युत-यांत्रिकी संभाग में पदस्थ उपयंत्री श्री जतन लाल अहिरवार का है। 15 जून को जारी तबादला आदेश को आज 1 महीना 5 दिन बीत गए, लेकिन साहब ने आज तक सागर में जॉइन नहीं किया।
*पूरा मामला क्या है?*
1. *15 जून 2026*: जतन लाल अहिरवार का ट्रांसफर भोपाल से सागर PWD वि/या संभाग में किया गया।
2. *26 जून 2026*: डिवीजन क्रमांक 1 विद्युत यांत्रिकी के कार्यपालन यंत्री ने उन्हें कार्यमुक्त कर तत्काल सागर जॉइन करने के निर्देश दिए।
3. *7 जुलाई 2026*: सागर के कार्यपालन यंत्री ने प्रमुख अभियंता को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की, क्योंकि निर्धारित 7 दिन में भी जॉइनिंग नहीं हुई।
नियम कहता है ट्रांसफर के 7 दिन के अंदर जॉइन करना अनिवार्य है। लेकिन यहां 35 दिन बाद भी कुर्सी खाली है।
*हाईकोर्ट से भी नहीं मिली राहत*
सूत्रों के अनुसार जॉइनिंग से बचने के लिए अहिरवार ने स्टे लेने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लेकिन सरकार की केविएट के कारण केस खारिज हो गया। कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद भी सागर में जॉइन नहीं किया गया।
*विभाग में लीपापोती, कार्रवाई जीरो*
सबसे गंभीर बात ये है कि 7 जुलाई को EE सागर की शिकायत के बाद भी आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। चर्चा है कि मामले को दबाने के लिए RL वर्मा और DS राजेश शाह से "बात" करने की कवायद चल रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक उपयंत्री खुलेआम सिविल सेवा आचरण नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है, कोर्ट से फटकार खा चुका है, और EE खुद पत्र लिख चुका है... तब भी PWD के आला अफसर आंख बंद करके क्यों बैठे हैं?
क्या ट्रांसफर के आदेश सिर्फ आम कर्मचारियों के लिए हैं? क्या "सेटिंग" के दम पर महीनों तक घर बैठकर तनख्वाह ली जा सकती है?
PWD की साख दांव पर है।प्रमुख अभियंता और प्रमुख सचिव को अब तय करना है कि अनुशासन बचेगा या "नो जॉइनिंग" का नया ट्रेंड शुरू होगा।