ग्वालियर PWD में EE देवेन्द्र भदौरिया ने नियम विरुद्ध ऑफलाइन टेंडर जारी करके करोड़ों रुपए के ठेके बांटे

Updated on 03-08-2026 10:06 PM

(*भोपाल-उत्तराखंड में बनाई बेशकीमती बेनामी संपत्ति*)

भोपाल | लोक निर्माण विभाग संभाग क्रमांक-1 ग्वालियर के प्रभारी कार्यपालन यंत्री पद से  पिछले महीने रिटायर हुए देवेंद्र भदोरिया द्वारा भारी भ्रष्टाचार करने का सनसनीखेज खुलासा हुआ  है। इसको लेकर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानि ईओडब्ल्यू में शिकायत की गई है जिसमें प्रमाणों के साथ भदौरिया के कार्यकाल में  रिश्वत लेकर करोड़ों रुपये के फर्जी ऑफलाइन टेंडर देने और  बेशकीमती संपत्ति बनाने का आरोप लगाया गया है।

*शिकायत में लगे 5 बड़े आरोप*

शिकायत के मुताबिक भदौरिया ने बिना अनुमति, बिना विज्ञापन के अपने चहेतों और रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए फर्जी तरीके से ऑफलाइन टेंडर जारी कर दिए। इतना ही नहीं बल्कि  उन्होंने ठेकेदारों से 10% कमीशन लेकर इन टैंडरों में निर्धारित राशि से 40% तक ज्यादा राशि का भुगतान करा दिया।

    शिकायत में कहा गया है कि भदौरिया ने  यह सभी टेंडर 50% कम दरों पर सैंक्शन किए। इतनी कम दर पर काम संभव न होने के कारण बाद में उन्होंने सप्लीमेंट्री बजट में इन टैंडरों की राशि 40% तक बढ़ा कर ठेकेदारों को  फर्जी भुगतान भी करा दिया । इसके लिए उन्होंने अपने संपर्क के चलते जून-जुलाई में  विभाग से लगभग 20 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि भी आवंटित करवा ली। शिकायत में ग्वालियर संभाग कार्यालय के बाबू धनराज सविता को भी इस मिलीभगत में शामिल बताया गया है।

इस गड़बड़ी की प्रमाणिक शिकायत के बाद भी  विभाग के प्रमुख सचिव और प्रमुख अभियंता ने कोई कार्रवाई नहीं की जिससे  आरोपी ने इस राशि आवंटित से चहेतों को फर्जी भुगतान करके सरकारी खजाने को नुक़सान पहुंचाया।

    शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रभारी कार्यपालन यंत्री भदौरिया ने भ्रष्टाचार की कमाई से भोपाल में कई मकान, उत्तराखंड में एक रिजॉर्ट और अन्य जगहों पर बेनामी संपत्ति खरीदी रखी है। इसमें भोपाल के चूना भट्टी इलाके में एक होटल रिसोर्ट और भव्य मकान बनाने का  जिक्र करते हुए सबूत के तौर पर उनके फोटोग्राफ भी दिए गए हैं।

    शिकायतकर्ता ने ईओडब्ल्यू से इस भ्रष्टाचार और बेशकीमती संपत्ति की जांच करने का अनुरोध किया है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि भदौरिया की चल-अचल संपत्ति की जांच कर जब्त की जाए।

भ्रष्टाचार उन्मूलन समिति के अध्यक्ष रवि कुमार भारतीय ने की है। इसकी प्रति विभाग के प्रमुख सचिव और प्रमुख अभियंता  को भी भेजी गई है।

       इस संबंध में अभी तक संबंधित अधिकारी या विभाग की ओर से इन आरोपों पर कोई बता या सफाई नहीं आई है। इससे  जाहिर है कि मामले की जांच के बाद ही सच्चाई सामने आ सकेगी। हालांकि अनियमितताओं में पारंगत देवेन्द्र भदौरिया विभागीय मंत्री के खासमखास सूरज सिंह कुशवाहा के जरिए अपनी खाली कुर्सी पर एक ऐसे शागिर्द को बैठाने में सफल रहे हैं जो उनके कारनामों के उजागर होने और जांच पड़ताल में कलाकारी दिखा सकता है।


 


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