( शोकॉज वाले ऑफिस में, घूस-फर्जीवाड़ा वाले चीफ की कुर्सी पर )
( संजरायजादा )
भोपाल। मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग में कानून और नियमों की किताब अब सिर्फ शो-पीस रह गई है। यहां का फॉर्मूला सीधा है -
*"छोटी मछली फंसे तो जाल, बड़ी मछली फंसे तो माल"*
*4 साफ-सुथरे = ऑफिस में बैठे*
विभागीय जांच और शो-कॉज नोटिस झेल रहे *4 अधीक्षण यंत्री* - संजय खांडे, जी.पी. वर्मा, संजय मस्के और पी.सी. वर्मा को फील्ड से हटा कर सीधे ऑफिस में कुर्सी पर बैठा दिया दिया गया। जुर्म? छोटा-मोटा कागजी पेंच। वो भी ठेकेदारों पर भरोसा कर लेने के कारण। लेकिन उनके कई अच्छे कार्यों को अनदेखा करके मामूली गलती पर बड़ी सजा दी गई।
*3 "हीरो" = डबल प्रमोशन का मजा*
उधर दूसरी तरफ 3 ईई साहब हैं जिनका रिकॉर्ड "सोने" से भी भारी है:
1. *वी.के. झा* - सरकारी मशीनरी किराए पर देकर कमाई का केस
2. *के.के. लच्छे* - लोकायुक्त द्वारा घूस लेते रंगे हाथ पकड़ाए
3. *योगेन्द्र कुमार* - फर्जी जाति प्रमाण पत्र से नौकरी का आरोपी
नतीजा? इन तीनों को *2 पद ऊपर चीफ इंजीनियर का प्रभार* देकर फील्ड में मलाईदार पोस्टिंग दे रखी है।
हैरानी की बात ये है कि हाल में हुई *ईई से एसई की पदोन्नति* में इन तीनों का नाम कारनामों की वजह से काट दिया गया। लेकिन "पैसों की खनक" ने कमाल कर दिया। बिना एसई बने ही विभाग के *दूसरे सबसे बड़े मलाईदार पद* पर यथावत जमे हुए हैं ।
अब ये तीनों *नियमों को ठेंगा* दिखाकर मनमाने फैसले ले रहे हैं। टेंडर, ठेके, बिल... सब इनके इशारे पर।
*मंत्री-पीएस के दावे हवा में*
हर महीने निर्माण की गुणवत्ता के लिए रैंडम जांच कराने वाले मंत्री *राकेश सिंह* और प्रमुख सचिव *सुखबीर सिंह* के सारे वादे इन "चीफ इंजीनियर" ईई की वजह से धराशायी हो रहे हैं।
ऐसा नहीं है कि विभाग में ईमानदार अफसरों की कमी हो।*20 से ज्यादा एसई* ऐसे हैं जिनका रिकॉर्ड एकदम साफ है और प्रमोशन लाइन में सबसे आगे हैं। लेकिन फील्ड की पोस्टिंग चाहिए तो "रेट" देना पड़ेगा। वरना एसई का अनुभव न होने के बावजूद ये *"सियार" शेर की खाल* पहनकर चीफ बने बैठे मौज उड़ाते रहेंगे।
*सवाल सीधा है*: PWD में अब प्रमोशन मेरिट से होगा या रेट से? और जनता के टैक्स का पैसा गुणवत्ता में जाएगा या "लिफाफों" में?