'सीमापार आतंकवाद के हम सबसे बड़े पीड़ित', संयुक्त राष्ट्र में भारत का पाकिस्तान को कड़ा संदेश, जमकर लताड़ा

Updated on 02-07-2026 12:25 PM
न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र में भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर सख्त रुख दिखाया है। पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए यूएन में भारतीय प्रतिनिधि हरीश पर्वथनेनी ने कहा कि भारत दशकों से सीमापार आतंकवाद का शिकार रहा है। आतंकवाद की वजह से हमारे लोगों को जान गंवानी पड़ी है। इससे भारत का एक रुख बना कि आतंकवाद को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। आतंकवाद के हर रूप की निंदा की जानी चाहिए। भारत ने एफएटीएफ को भी मजबूती से लागू करने पर जोर दिया है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वथनेनी हरीश ने सोमवार को यूनाइटेड नेशंस ग्लोबल काउंटर-टेररिज्म स्ट्रैटेजी के नौवें रिव्यू में बात रखी है। उन्होंने कहा कि भारत ने 2006 में कॉम्प्रिहेंसिव कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टेररिज्म (CCIT) को अपनाने की मांग की थी। यह आतंकवादियों और उनके स्पॉन्सर्स को सुरक्षित ठिकानों, फंड और हथियारों तक पहुंच से रोकने के लिए जरूरी है। CCIT को पूरा करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाने का समय आ गया है।

हम दशकों से आतंक से पीड़ित: पी हरीश

पर्वथनेनी हरीश ने इस दौरान कहा, 'भारत दशकों से सीमा पार आतंकवाद का शिकार रहा है। हमारे लोगों ने आतंकवाद की कीमत जान गंवाकर, परिवारों को नुकसान पहुंचाकर और समाज को तोड़कर चुकाई है। इस अनुभव ने भारत के नजरिए को बनाया है कि आतंकवाद को सही नहीं ठहराया जा सकता। किसी भी राजनीतिक कारण या स्ट्रेटेजिक सोच के बावजूद आतंकवाद के सभी रूपों की साफतौर पर निंदा की जानी चाहिए।' भारत ने यूएन में छह मुख्य प्राथमिकताओं पर जोर दिया है।

1. इंटरनेशनल कम्युनिटी को काउंटर-टेररिज्म में दोहरे स्टैंडर्ड को मना करना चाहिए। आतंकवाद के अपराधियों, ऑर्गनाइजर, फाइनेंसर और स्पॉन्सर को जिम्मेदार ठहराना और उन्हें सजा दिलाना हमारी जिम्मेदारी है। सदस्य देशों को इस बारे में पूरा सहयोग पक्का करना चाहिए।2. टेरर फाइनेंसिंग का मुकाबला करना हमारी मिली-जुली कोशिशों का सेंटर बना रहना चाहिए। इंटरनेशनल कम्युनिटी को फाइनेंशियल इंटेलिजेंस शेयरिंग में सुधार करना चाहिए। FATF स्टैंडर्ड लागू करने को मजबूत करते हुए यह पक्का करना चाहिए कि कोई भी इलाका टेरर फाइनेंसिंग के लिए सुरक्षित जरिया न बना रहे।

3. आतंकवादियों के नई और उभरती टेक्नोलॉजी के गलत इस्तेमाल पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है। आतंकवादी ग्रुप एडवांस्ड एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन, ड्रोन, ऑटोनॉमस हथियार, सोशल मीडिया, माउंटेन ट्रेकिंग और दूसरे खास मैपिंग ऐप, ऑनलाइन रेडिकलाइजेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीपफेक, वर्चुअल एसेट्स और डार्क वेब का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये टेक्नोलॉजी रेगुलेटरी और एनफोर्समेंट फ्रेमवर्क से तेजी से बढ़ रही हैं। भारत एक सुरक्षित, भरोसेमंद और आसान डिजिटल इकोसिस्टम का सपोर्ट करता है।
4. आतंकवाद के शिकार लोग हमारी कोशिशों के केंद्र में रहने चाहिए। अक्सर इंटरनेशनल सिस्टम आतंकवाद के बारे में इंस्टीट्यूशनल या प्रोसीजरल शब्दों में बात करता है जबकि पीड़ितों की आवाजों पर बाद में ध्यान दिया जाता है और उन्हें बहुत कम मल्टीलेटरल कवरेज मिलता है। उन्हें वह सम्मान और रिहैबिलिटेशन देने के लिए कोशिशों को मजबूत करना होगा जिसके वे हकदार हैं।

5. इंटरनेशनल कोऑपरेशन और कैपेसिटी बिल्डिंग की कोशिशें प्रैक्टिकल, डिमांड-ड्रिवन और फायदा उठाने वाले देश की जरूरतों के हिसाब से होनी चाहिए। ग्लोबल साउथ देशों को खास एरिया में मदद की जरूरत है और उन पर फ्रेमवर्क थोपने से बचना चाहिए। कैपेसिटी-बिल्डिंग में नेशनल ओनरशिप का सम्मान होना चाहिए, जो पाने वाले देशों की प्रायोरिटी के हिसाब से हो।
6. आतंकवादी सिर्फ आतंकवादी ही होता है और कुछ नहीं। हमें आतंकवाद को सही ठहराने के लिए कोई शिकायत ढूंढे बिना, खूनी सोच को जड़ से खत्म करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।

पीएम मोदी का किया जिक्र

पी हरीश ने इस दौरान कहा कि भारत ने टेरर फाइनेंसिंग (आतंकवाद के लिए पैसे जुटाने) पर वैश्विक ध्यान केंद्रित करने के लिए काम किया है। हम सभी सदस्य देशों और संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि रणनीति की ना केवल हर दो साल में समीक्षा हो, बल्कि उसे वास्तव में लागू भी किया जाए।
पी हरीश ने अपने भाषण के आखिर में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है, कहीं भी आतंकवाद का मतलब हर जगह शांति के लिए खतरा है। दुनिया आतंकवाद के मामले में कोई अस्पष्टता बर्दाश्त नहीं कर सकती है। आतंकवाद के पीड़ितों को न्याय मिलना चाहिए। आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षा मिलनी चाहिए और इस महासभा को नेतृत्व करना होगा।

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