( संजय रायजादा )
भोपाल । लोक निर्माण विभाग में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। 2003 से 2010 तक भोपाल PWD संभाग क्रमांक-2 में एक्जीक्यूटिव इंजीनियर रहे वी.के. आरख पर आरोप है कि उन्होंने छोला रेलवे ओवरब्रिज निर्माण में नियमों को ताक पर रखकर सरकार को 7 करोड़ 23 लाख 19 हजार 226 रुपये का नुकसान पहुंचाया।
विभाग के उपसचिव नियाज़ अहमद खान द्वारा 8 जून ,2022 को मामले में वी के आरख को आरोप पत्र थमाते हुए विभागीय जांच शुरू की थी । लेकिन चार साल में भी विभागीय जांच पूरी नहीं हो सकी है।
*क्या है पूरा मामला...?*
विभागीय उपसचिव द्वारा जारी आरोप पत्र के मुताबिक, वी.के. अरख ने छोला ROB के निर्माण के लिए ठेकेदार मुंबई की बंका कंस्ट्रक्शन कंपनी के अनुबंध में एक्सलेशन से जुड़ी कंडिका 2.33 के तहत ब्रिज कार्य हेतु K-1, K-2 और K-3 के कटे हुए फैक्टरों को नियम विरूद्ध शामिल करा लिया। इसके लिए पहले उन्होंने तत्कालीन चीफ इंजीनियर (रा प) की अध्यक्षता में बैठक में यह प्रस्ताव रखा। बैठक में तय हुआ कि इसके लिए सरकार से अनुमति ली जाए। इस प्रक्रिया के बाद तत्कालीन चीफ इंजीनियर का ट्रांसफर हो गया और के सी अहिरवार को नया चीफ इंजीनियर बना दिया गया।
आरोप पत्र के मुताबिक वी.के. आरख ने नए चीफ इंजीनियर श्री अहिरवार से पूर्ववर्ती चीफ इंजीनियर की बैठक का सरकार से अनुमति लेने का फैसला छिपा लिया और उन्हें मिस गाइड करके अनुबंध में संशोधन करके हटाए गए तीनों फेक्टर K -1, K -2 K -3 को जोड़ने की अनुमति ले ली। नियमों को धत्ता बताते हुए की गई उनकी इस हेराफेरी से ठेकेदार को गलत तरीके से भुगतान हुआ और शासन को 7.23 करोड़ से ज्यादा की चपत लगी।
*4 साल में भी जांच पूरी नहीं*
मामला सामने आने के बाद विभाग के तत्कालीन उपसचिव नियाज़ अहमद खान ने 8 जून 2022 को श्री आरख को आरोप पत्र जारी कर विभागीय जांच शुरू करवा दी। लेकिन आरोपों के समर्थन में तमाम दस्तावेज मौजूद होने के बावजूद वी के आरख के धनबल के चलते चार साल बाद भी जांच पूरी नहीं हो पाई है।
*आरोपी को प्रमोशन, अब भोपाल के चीफ इंजीनियर की कुर्सी पर नजर*
सरकारी खजाने को करीब सवा सात करोड़ रुपए का चूना लगाने वाला आरोपी वी.के. आरख फिलहाल ग्वालियर PIU में प्रभारी चीफ इंजीनियर के पद पर काम कर रहे हैं। हालांकि लोकायुक्त तक पहुंच चुके अपने इस मामले को निपटाने के लिए वे रिश्वत के दम पर भोपाल के चीफ इंजीनियर का पद ‘खरीदने’ की कोशिश में लगे हैं। इसके लिए उनकी दो करोड़ रुपए की डील हुई है जिसमें से 50 लाख रुपए एडवांस दिया जा चुका है।
फर्जी जाति प्रमाण पत्र से सरकारी नौकरी पाने सहित कई अनियमितताओं में फंसे एक भ्रष्ट इंजीनियर की विभागीय जांच में हो रही देरी और आरोपी अधिकारी को लगातार मिल रहे प्रमोशन पर सवाल उठ रहे हैं। पीडब्ल्यूडी के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मामले में टिप्पणी से इनकार किया है तो विभागीय मंत्री राकेश सिंह अपने संरक्षण में आ गए इस इंजीनियर को लेकर कुछ बोलने के मूड में नहीं है।
मजेदार बात यह है की भ्रष्ट आचरण के चलते विभाग में दोस्तों से ज्यादा दुश्मन बनाने वाले श्री आरख को भोपाल आने से रोकने के लिए भ्रष्टाचार से जुड़े इस बड़े मामले को ईओडब्ल्यू तक पहुंचाया जा रहा है ताकि वे रिटायरमेंट तक कानूनी और अदालती कार्यवाही में उलझे रहें।