
विश्वविद्यालय प्रशासन लंबे समय से नियमित भर्ती नहीं करा सका है। एक भी बार ऐसा नहीं हुआ कि 54 में आधे पद भी रेगुलर फैकल्टी से भरे गए हों। 2016-17 में भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी, जो विवादों के कारण यह पूरी नहीं हो सकी।
मार्च 2025 में हाईकोर्ट ने इसे अवैध घोषित करते हुए निरस्त कर दिया और विश्वविद्यालय को नए सिरे से विज्ञापन जारी कर योग्य अभ्यर्थियों को अवसर देने के निर्देश दिए, जो अब तक शुरू नहीं हो सकी। इस भर्ती में प्रोफेसर, रीडर और असिस्टेंट प्रोफेसर के कुल 27 पद शामिल थे।
अलग संकाय के कोर्स एक स्कूल में
स्थिति यह है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने अलग-अलग संकायों को मिलाकर स्कूल संचालित करना शुरू कर दिया है। कॉमर्स और मैनेजमेंट के पाठ्यक्रम एक ही स्कूल के अंतर्गत चलाए जा रहे हैं, जबकि नियमानुसार इनके लिए अलग शैक्षणिक इकाइयों की जरूरत होती है। फैकल्टी की कमी का असर शैक्षणिक गतिविधियों पर दिखाई देने लगा है। छात्र संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।
ये हैं यूजीसी के मापदंड...
यूजीसी के ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग प्रोग्राम रेगुलेशन 2020 के अनुसार प्रत्येक स्कूल के लिए कम से कम एक प्रोफेसर या एसोसिएट प्रोफेसर स्तर का कोर्स कोऑर्डिनेटर और न्यूनतम तीन पूर्णकालिक शिक्षक अनिवार्य हैं। भोज में चार स्कूल संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें एजुकेशन, आईटी एंड बेसिक साइंस, कॉमर्स एंड मैनेजमेंट तथा आर्ट्स एंड ह्यूमैनिटीज शामिल हैं।
जल्द भर्ती की जाएगी
भर्ती को लेकर अब किसी तरह का विवाद नहीं है। रोस्टर बनाने की कार्रवाई प्रचलित है। रोस्टर तैयार होते ही ही भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया जाएगा।
-प्रो. मिलिंद दाण्डेकर, कुलगुरु, भोज (मुक्त) विवि
एक्सपर्ट व्यू - डॉ. एचएस त्रिपाठी, पूर्व रजिस्ट्रार
रैगुलर फैकल्टी के बिना क्वालिटी पर असर
रेगुलर फैकल्टी की कमी से दूरस्थ शिक्षा की क्वालिटी प्रभावित हो रही है। भोज विवि में छात्रों के लिए कॉन्टेक्ट क्लासेस महत्वपूर्ण होती हैं। रेगुलर फैकल्टी न होने से ये बाहरी शिक्षकों के सहयोग से लगानी पड़ती हैं,जो एक साथ इतना लंबा समय नहीं दे पाते। कोर्स डिजाइन नहीं करा पाते। स्टडी मटेरियल भी बाहरी शिक्षकों से तैयार कराना होता है। विवि ऑनलाइन प्रोग्राम शुरू नहीं करा पा रहा है।