परिवहन चेक पाइंट:183 से 73 करोड़ पर सिमटी वसूली

Updated on 24-07-2026 12:35 PM
भोपाल, मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में परिवहन विभाग की नई व्यवस्था को लेकर एक चौंकाने वाला बड़ा खुलासा हुआ है। प्रदेश सरकार द्वारा 1 जुलाई 2024 से प्रदेश के बॉर्डर पर संचालित 45 स्थायी चेकपोस्टों को बंद करके उनकी जगह 12 जुलाई 2024 से नए 'रोड सेफ्टी एंड एनफोर्समेंट चेकिंग पॉइंट' शुरू किए गए थे।

परिवहन विभाग के दावों के मुताबिक नई व्यवस्था से हाईवे पर लगने वाले ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाने और चेकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए उठाया गया था। हालांकि,कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल द्वारा पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह द्वारा पेश किए गए आंकड़ों ने विभागीय दावों की हवा निकाल दी है।

आंकड़ों से साफ पता चलता है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद से राज्य सरकार के राजस्व में लगभग 60 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे सीधे तौर पर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ है।

विधानसभा में प्रस्तुत सरकारी आंकड़ों का विश्लेषण करने पर विभागीय दावों और जमीनी हकीकत का बड़ा अंतर उजागर होता है। बंद किए गए 45 परिवहन चेकपोस्टों पर जुलाई 2022 से जून 2024 तक के 24 महीनों की अवधि में कुल 4,56,427 वाहनों के चालान बनाए गए थे और उनसे मोटरयान कर तथा शमन शुल्क के रूप में 183 करोड़ रुपए की राशि वसूल की गई थी।

इसके विपरीत, जुलाई 2024 से जून 2026 तक संचालित किए गए 45 नए चेकिंग पॉइंट्स पर इन्हीं 24 महीनों के दौरान चालानों की संख्या घटकर केवल 2,60,178 रह गई और कुल वसूली मात्र 73.30 करोड़ रुपए ही हो सकी।

विधायक प्रताप ग्रेवाल ने इस आंकड़े को विभाग में जारी गड़बड़ी का सबसे बड़ा सबूत करार देते हुए मंत्री से सीधा सवाल किया है कि क्या पहले की 183 करोड़ रुपए की वसूली सही थी या वर्तमान में हो रही 73 करोड़ रुपए की वसूली सही है।

चेक पोस्ट क्यों बंद किए? तो जवाब मिला जानकारी जुटा रहे

विधायक प्रताप ग्रेवाल ने अपने प्रश्न में पूछा था कि आखिर सीमाओं पर पुराने चेक पोस्टों में ऐसी क्या अव्यवस्थाएं उत्पन्न हो रही थीं, जिनके कारण उन्हें रातों-रात बंद करने का निर्णय लिया गया, लेकिन उत्तर में इसका कोई कारण नहीं बताया गया।

इसके अतिरिक्त, 30 जून 2024 की स्थिति में बंद चेक पोस्टों पर पदस्थ कर्मचारियों, भवनों, भूमियों व संसाधनों और 12 जुलाई 2024 को नए पॉइंट्स पर तैनात स्टाफ और सुविधाओं का ब्योरा मांगा गया था।

इस पर परिवहन मंत्री ने केवल इतना लिखकर मामला टाल दिया कि 'जानकारी संकलित की जा रही है'। नई व्यवस्था शुरू हुए दो साल से अधिक का समय बीत जाने पर भी विभागीय अमले और संपत्तियों की जानकारी उपलब्ध न होना लीपापोती का अंदेशा जताता है।

हाई-टेक कैमरों का दावा कागजी — रोड सेफ्टी के बावजूद हादसे बढ़े

विधानसभा उत्तर में परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने चेकिंग प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने का दावा किया है। उन्होंने बताया कि चेकिंग अमले को बॉडी-वार्न कैमरे, ऑनलाइन चालान के लिए POS मशीनें, स्पीड रडार गन उपलब्ध कराई गई हैं और पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए केंद्रीय कमांड एवं कंट्रोल सेंटर स्थापित किए गए हैं।

हालांकि, विधायक प्रताप ग्रेवाल का कहना है कि ये तमाम हाई-टेक उपकरण मात्र कागजी औपचारिकता साबित हो रहे हैं। नई व्यवस्था का मूल उद्देश्य 'रोड सेफ्टी' (सड़क सुरक्षा) तय किया गया था, परंतु पॉइंट्स बनने के बाद प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों में दोगुनी वृद्धि दर्ज की गई है।

विधायक ने आरोप लगाया कि दुर्घटनाओं में हुई यह वृद्धि यह सिद्ध करती है कि मैदानी अमले का उद्देश्य सड़क सुरक्षा न होकर केवल वाहनों से वसूली में व्यस्त रहना है।

विधायक ने की चेकिंग पॉइंट्स बंद करने की मांग

आंकड़ों की पड़ताल में यह भी सामने आया है कि वर्तमान में संचालित प्रत्येक चेकिंग पॉइंट से प्रतिमाह औसतन मात्र 7 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त हो रहा है। विधायक प्रताप ग्रेवाल ने आरोप लगाया है कि प्रत्येक चेकिंग पॉइंट पर तैनात अमले के वेतन, ईंधन, ढांचागत व्यवस्थाओं और हाई-टेक उपकरणों के संचालन पर होने वाला प्रतिमाह का प्रशासनिक खर्च इस 7 लाख रुपए की आय से कहीं अधिक है।

कमाई कम और खर्च ज्यादा होने के कारण ही विभाग अपने कर्मचारियों, वाहनों और संसाधनों का वास्तविक ब्योरा विधानसभा में देने से बच रहा है। ग्रेवाल ने कहा कि जब चेकिंग पॉइंट्स से न तो राजस्व मिल रहा है और न ही सड़क सुरक्षा में कोई सुधार हुआ है, तो ऐसी घाटे वाली और अव्यवस्था से भरी व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया जाना चाहिए।


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