'अमेरिका ने 20 साल कहा, ईरान 5 पर हुआ राजी,' इस्लामाबाद में तेहरान के परमाणु सपने पर अड़ गए थे दोनों पक्ष, नहीं हुई डील

Updated on 14-04-2026 01:41 PM
वॉशिंगटन: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई वार्ता के फेल होने में कथित तौर पर ईरान का परमाणु कार्यक्रम अहम वजह बना है। बातचीत में अमेरिका की ओर से ईरान से यूरेनियम संवर्धन पर 20 साल की रोक स्वीकार करने का प्रस्ताव रखा गया। ईरान ने इस मांग को मानने से इनकार कर दिया। ईरानी डेलीगेशन ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वह इस मामले में पांच साल से ज्यादा फ्रीज करने की बात नहीं मानेगा। ऐसे में यह मुद्दा बातचीत में अहम अड़चन बन गया।

अमेरिकी अखबार एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामाबाद में अमेरिका ने ईरान के यूरेनियम पर कम से कम 20 साल की रोक का सुझाव दिया। साथ ही और भी कई अन्य तरह की पाबंदियों पर जोर दिया। तेहरान ने इसे वॉशिंगटन की मांगों को 'बहुत ज्यादा' माना और इस पर दोनों पक्षों में कोई सहमति नहीं बन पाई। ईरान ने ने पांच साल के लिए संवर्धन रोकने की पेशकश की, जिस पर अमेरिकी नहीं माने।

ईरान और अमेरिका की अपनी-अपनी मांगें

ईरान के यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह रोकने और अपने मौजूदा भंडार को खत्म करने के सवाल इस्लामाबाद वार्ता में सबसे बड़ी बाधा बने। रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिकी वार्ताकारों ने ईरान से अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम को देश से बाहर भेजने की मांग की। ईरान ने इसके बजाय डाउन-ब्लेंडिंग (कम सांद्रता में बदलने) की एक निगरानी वाली प्रक्रिया का प्रस्ताव रखा।दोनों पक्षों में गतिरोध के बावजूद एक अमेरिकी अधिकारी ने एक्सियोस से कहा है कि वार्ता टूटी नहीं है। अधिकारी ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है और संभावित समझौते की दिशा में प्रगति हो रही है। पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की की मध्यस्थता से हो रही बातचीत से 21 अप्रैल को खत्म हो रहे सीजफायर से पहले कोई नतीजा निकलने की उम्मीद की जा रही है।

12 साल की रोक पर बनेगी सहमति?

एक्सपर्ट इयान ब्रेमर ने मंगलवार को दावा किया है कि अमेरिका और ईरान यूरेनियम संवर्धन पर बीच के रास्ते (12 साल की रोक) के जरिए समझौते के करीब पहुंच रहे हैं। अमेरिका और ईरान की वार्त की मेजबानी करने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी कहा है कि दोनों पक्षों के बीच बचे हुए मतभेदों को दूर करने के प्रयास जारी हैं और समझौते की उम्मीद बरकरार है।
ईरान का परमाणु कार्यक्रम लंबे समय से अमेरिका, इजरायल और पश्चिम के देशों के लिए चिंता का सबब रहा है। हालांकि ईरान ने बार-बार कहा है कि उसका परमाणु बम बनाने का कोई इरादा नहीं है। इसके बावजूद बीते कुछ महीनों में ही अमेरिका और इजरायल दो बार (जून 2025 और फरवरी, 2026) ईरान पर हमला कर चुके हैं।

ईरान के अमेरिका-इजरायल से चल रहे युद्ध में 39 दिन बाद 8 अप्रैल को सीजफायर हुआ है। दो हफ्ते की जंगबंदी के बाद दोनों पक्षों की शनिवार को इस्लामाबाद में बैठक हुई। बैठक में युद्ध को स्थायी तौर पर खत्म करने के लिए समझौते की उम्मीद थी लेकिन 21 घंटे की बातचीत बेनतीजा रही। वार्ता फेल के पीछे ईरान के परमाणु कार्यक्रम को वजह माना गया है।

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