
रायगढ़: लघु फिल्म प्रतियोगिता के जरिए साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया।
सोशल मीडिया पर 6.02 करोड़ से अधिक व्यूज
अभियान के दौरान डिजिटल माध्यमों का भी व्यापक उपयोग किया गया। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के सहयोग से 3,100 से अधिक सोशल मीडिया पोस्ट साझा की गईं, जिन्हें 6.02 करोड़ से अधिक व्यूज मिले।
रायपुर में आयोजित साइबर जागरूकता लघु फिल्म प्रतियोगिता में 11 राज्यों के 35 जिलों से 162 फिल्में प्राप्त हुईं। इन फिल्मों और अन्य डिजिटल गतिविधियों के माध्यम से साइबर अपराधों के तौर-तरीकों तथा उनसे बचाव के उपायों को सरल तरीके से प्रस्तुत किया गया। युवाओं को साइबर प्रहरी के रूप में जोड़ने की पहल भी अभियान का हिस्सा रही।
साइबर अपराधियों के नेटवर्क पर भी कार्रवाई
जनजागरूकता के साथ छत्तीसगढ़ पुलिस ने साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले म्यूल बैंक खातों, ऐसे खाते खुलवाने में कथित रूप से संलिप्त बैंककर्मियों और फर्जी सिम उपलब्ध कराने वालों के विरुद्ध भी कार्रवाई की।
उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने 9 अक्टूबर को रायपुर में आयोजित साइबर जागृति अभियान के अभिनंदन समारोह में बताया कि साइबर अपराधियों के नेटवर्क के विरुद्ध कार्रवाई से साइबर अपराधों से संबंधित एफआईआर में कमी आई है और ठगी की राशि की रिकवरी दर में वृद्धि हुई है।
पुलिस नागरिकों को साइबर ठगी की स्थिति में राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तत्काल शिकायत करने अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के लिए भी जागरूक कर रही है। समय पर शिकायत दर्ज कराने से धोखाधड़ी की राशि को रोकने या वापस प्राप्त करने की संभावना बढ़ सकती है।
आठ जिलों को किया गया सम्मानित
साइबर जागृति अभियान की उपलब्धियों और जिलों की नवाचारी पहलों को प्रोत्साहित करने के लिए 9 अक्टूबर 2026 को रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में राज्यस्तरीय अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। इसमें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा शामिल हुए।
समारोह में साइबर जागरूकता के क्षेत्र में पहल करने वाले कोंडागांव, रायपुर, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, दुर्ग, गरियाबंद और मुंगेली जिलों को सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता आवश्यक हो गई है। उन्होंने अभियान को लगातार जारी रखने और इसे जनआंदोलन का स्वरूप देने पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सात सप्ताह के अभियान का समापन साइबर जागरूकता के प्रयासों का अंत नहीं, बल्कि आगे की शुरुआत है।
सतर्कता और समय पर शिकायत से बच सकता है नुकसान
साइबर अपराधों के तरीके लगातार बदल रहे हैं। ऐसे में नागरिकों को नई धोखाधड़ियों की जानकारी देना, संदिग्ध गतिविधियों को पहचानने के लिए प्रशिक्षित करना और शिकायत दर्ज कराने के सही माध्यमों से अवगत कराना महत्वपूर्ण है।
छत्तीसगढ़ पुलिस का साइबर जागृति अभियान इसी दिशा में चलाया गया प्रयास है। गांवों तक पहुंच, स्थानीय नवाचार, महिलाओं और युवाओं की भागीदारी तथा डिजिटल माध्यमों के उपयोग से साइबर सुरक्षा का संदेश व्यापक स्तर पर पहुंचाने की कोशिश की गई है। अभियान के बाद भी जागरूकता जारी रखने पर जोर दिया गया है, ताकि नागरिक डिजिटल लेनदेन में सतर्क रहें और ठगी का शिकार होने पर तत्काल शिकायत कर सकें।