सिंहस्थ में अतिक्रमण हुआ तो नपेंगे तहसीलदार और पुलिस अफसर, नए कानून में तय हुई सख्त सजा

Updated on 03-07-2026 03:31 PM
भोपाल। उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ-2028 को भव्य और निर्बाध बनाने के लिए राज्य सरकार पहली बार एक बड़ा कानूनी बदलाव करने जा रही है। नए सिंहस्थ एक्ट के तहत अब मेला क्षेत्र के भीतर किसी भी प्रकार का पक्का या स्थायी निर्माण करना कानूनन अपराध माना जाएगा।3500 से 4000 हेक्टेयर में फैले इस विशाल मेला क्षेत्र में यदि कोई भी व्यक्ति स्थायी निर्माण या अतिक्रमण करता है, तो उसके खिलाफ सीधे केस दर्ज किया जाएगा। नगरीय विकास विभाग ने इस नए एक्ट का मसौदा (ड्राफ्ट) तैयार कर लिया है, जिसका उच्च स्तर पर प्रेजेंटेशन भी हो चुका है।
अगले सप्ताह वरिष्ठ सचिवों की समिति से मंजूरी मिलने के बाद इसे कैबिनेट में रखा जाएगा, और सरकार की कोशिश है कि इसे इसी मानसून सत्र में बिल के रूप में पेश कर दिया जाए।

लापरवाही पर अधिकारियों पर भी गिरेगी गाज

मेला क्षेत्र में अतिक्रमण रोकना सिर्फ जनता की नहीं, बल्कि प्रशासनिक अमले की भी जिम्मेदारी होगी।
लापरवाही पर एक्शन: यदि सिंहस्थ क्षेत्र में अतिक्रमण रोकने में लापरवाही पाई गई, तो तहसीलदार, राजस्व अधिकारी, पुलिस और नगर निगम अधिकारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता ( बीएनएस ) के तहत कड़ी कार्रवाई की जा सकेगी।
कलेक्टर करेंगे मॉनिटरिंग: जिला कलेक्टर स्वयं इन अधिकारियों की मॉनिटरिंग करेंगे और तय समय-सीमा के भीतर मेला क्षेत्र की स्टेटस रिपोर्ट लेंगे।

1955 के पुराने कानून की जगह लेगा नया एक्ट

वर्तमान में लागू 'मध्यभारत सिंहस्थ मेला अधिनियम-1955' को अब पूरी तरह बदल दिया जाएगा। पुराने कानून में केवल 17 प्रमुख प्रावधान थे, जिन्हें अब समय की मांग और तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप बढ़ाकर 50 से अधिक कर दिया गया है।

पहली बार मेला अधिकारी को मिलेंगे 'सुपर राइट्स'

नए एक्ट में मेला अधिकारी (वर्तमान में उज्जैन संभाग के कमिश्नर) को बेहद व्यापक और शक्तिशाली अधिकार सौंपे गए हैं।
अस्थायी भू-अर्जन: मेला क्षेत्र में जमीन का अस्थायी अधिग्रहण (सिर्फ सिंहस्थ अवधि तक प्रभावी) करने का अधिकार होगा। सिंहस्थ समाप्त होने के बाद जमीन फिर से अपनी पूर्व स्थिति में लौट आएगी।
प्रबंधन और सुरक्षा: मेले का संपूर्ण प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य सभी प्रशासनिक कार्यों की अंतिम जिम्मेदारी और निर्णय लेने का अधिकार मेला अधिकारी के पास ही होगा।

दो स्तर पर संभाली जाएगी व्यवस्था

सिंहस्थ के सफल आयोजन को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था को दो कमेटियों में बांटा गया है।
सेंट्रल कमेटी: इसके अध्यक्ष संबंधित विभाग के मंत्री होंगे। इस कमेटी में सिंहस्थ आयोजन से सीधे जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों को सदस्य बनाया जाएगा, जिसकी संरचना तय करने का हक सरकार के पास सुरक्षित रहेगा।
लोकल कमेटी: इसमें नगर निगम, जिला प्रशासन और पुलिस विभाग सहित स्थानीय स्तर पर सिंहस्थ आयोजन से जुड़े 15 से 20 अधिकारी शामिल होंगे। राज्य सरकार इसमें अपनी तरफ से कुछ नामित सदस्यों को भी जोड़ सकेगी।

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