सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद एमपी के कॉलेजों में बदलेंगे नियम, अब विद्यार्थियों का तनाव भी दूर करेंगे प्रोफेसर

Updated on 13-06-2026 11:31 AM

भोपाल। विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद प्रदेश के कालेजों में शिक्षकों और कर्मचारियों की जिम्मेदारियां बढ़ने जा रही हैं। अब केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को तनावमुक्त और भेदभाव रहित माहौल उपलब्ध कराना भी शिक्षकों की जिम्मेदारी होगी।

नए शैक्षणिक सत्र के पहले उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी सरकारी और निजी कॉलेजों में इस दिशा में पहल शुरू कर दी है। इसके तहत छह जुलाई को प्रदेशभर के कालेजों के शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए विशेष ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।उच्च शिक्षा विभाग ने सभी कालेजों को निर्देश जारी कर प्रशिक्षण में शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कहा है। दो घंटे के इस कार्यक्रम में कॉलेजों के सभी शिक्षक और कर्मचारी संस्थान के किसी निर्धारित हाल में एकत्र होकर भोपाल से प्रसारित होने वाले प्रशिक्षण सत्र में शामिल होंगे। इस संबंध में उच्च शिक्षा विभाग ने सभी कालेजों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

6 से 8 जुलाई तक चलेगा प्रशिक्षण कार्यक्रम

उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार शासकीय महाविद्यालयों के प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों के लिए यह आनलाइन प्रशिक्षण 6 जुलाई को किया जाएगा, जबकि निजी महाविद्यालयों के प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों के लिए 7 जुलाई को प्रशिक्षण होगा। इसके अतिरिक्त 8 जुलाई को विश्वविद्यालयों के प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों के लिए भी इसी प्रकार का ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रस्तावित है, जिससे उच्च शिक्षा संस्थानों में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति संवेदनशीलता को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।

फोटो व वीडियोग्राफी अनिवार्य होगा

प्रशिक्षण कार्यक्रम की फोटो और वीडियोग्राफी अनिवार्य की गई है। इसके अलावा सभी प्रतिभागियों की हस्ताक्षरयुक्त उपस्थिति भी विभाग को भेजनी होगी। विभाग ने 9 जुलाई तक प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

काउंसलर्स रखे जाएंगे

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार प्रत्येक शिक्षण संस्थान में मानसिक स्वास्थ्य नीति, प्रशिक्षित परामर्शदाता, नियमित मानसिक स्वास्थ्य जांच, उत्पीड़न विरोधी तंत्र और आत्मघाती कदम रोकने संबंधी सहायता व्यवस्था विकसित की जानी है।

साथ ही जाति, लिंग या योग्यता के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव को रोकने, रचनात्मक मूल्यांकन प्रणाली अपनाने और खेल, कला और मनोरंजन गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है।विभाग का मानना है कि इन उपायों से कालेज परिसरों में अधिक सुरक्षित, संवेदनशील और सकारात्मक वातावरण तैयार किया जा सकेगा।


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