'पाकिस्तान नाकामी की कगार पर, अमेरिकी दोस्‍ती से नहीं होगा भला', सिंगापुर के पूर्व राजनयिक ने धो डाला

Updated on 04-07-2026 03:25 PM
इस्लामाबाद: अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करके पाकिस्तान खुद पर इतरा रहा है और इसे अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत के तौर पर पेश कर रहा है। लेकिन सिंगापुर के पूर्व राजदूत बिलहारी कौसिकन ने पाकिस्तान को एक नाकाम देश कहकर उसकी पोल खोल दी है। कौसिकन ने कहा कि पाकिस्तान एक ऐसा देश है जो विफल होने के कगार पर खड़ा है। उन्होंने साफ कहा कि भारत या अफगानिस्तान नहीं, पाकिस्तान की समस्या उसके अपने राजनेता और सेना हैं।

पाकिस्तान को बताया नाकामी की कगार पर

सिंगापुर के पूर्व राजनयिक से जब पूछा गया कि पाकिस्तान अगले पांच साल में कहां हो सकता है तो उन्होंने कहा कि पाकिस्तान विफलता की कगार पर खड़ा है। उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की तरफ इशारा करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने अपनी कूटनीतिक चाल अच्छी तरह से चली है, लेकिन इसके पाकिस्तान की जनता का पेट नहीं भरता।

पाकिस्तान की कूटनीतिक कामयाबी का फूटा बुलबुला

कौसिकन ने पाकिस्तान के हालात पर बेबाकी से अपनी राय रखते हुए कहा कि हालिया राजनयिक सफलताओं से पाकिस्तान की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आने वाला है। यहां तक कि अमेरिका के साथ उसके संबंधों में कोई खास सुधार नहीं होगा।

अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता कराने को उन्होंने पाकिस्तान की कूटनीतिक तेजी और कामयाबी के रूप में स्वीकार किया कहा कि इससे अमेरिकी की नजर में पाकिस्तान छवि कुछ हद तक बेहतर बनाने में मदद मिली है, लेकिन इसके पाकिस्तान के लोगों का पेट नहीं भरता। उनका इशारा पाकिस्तान के गहरे होते आर्थिक संकट की ओर था।जब एक पाकिस्तानी पत्रकार ने यह कहा कि पाकिस्तान की ज्यादा परेशानियों भारत और अफगानिस्तान के चलते हैं, तो पूर्व राजनयिक ने करारा जवाब देकर बोलती बंद कर दी। उन्होंने कहा, आप हर चीज के लिए भौगोलिक स्थिति को दोष नहीं दे सकते। यह बहना है। उन्होंने पाकिस्तानी नेताओं को समय की बर्बादी बताया कि पाकिस्तान का संकट उसके नेताओं और सेना ने पैदा किया है।

भारत को लेकर कौसिकन ने क्या कहा?

इसी सम्मेलन में जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत चीन के खिलाफ संतुलन बनाने वाली भूमिका निभा सकता है, तो उन्होंने कहा कि भारत यह भूमिका निभा रहा है लेकिन बहुत निर्णायक तौर पर नहीं। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका की जगह नहीं ले सकता है। भारत की अपनी समस्याएं हैं और वह हिंद महासागर पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत आज फिलीपींस और दूसरे देशों को हथियार बेच रहा है और एक बड़ा बाजार है। ऐसे में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा, लेकिन अमेरिका की जगह नहीं ले सकता।

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