भोपाल। मध्य प्रदेश में वाहनों की संख्या पिछले 15 वर्षों में दोगुनी से अधिक होकर 2.42 करोड़ के पार पहुंच गई है। लेकिन इन वाहनों के पंजीयन, फिटनेस, परमिट, प्रवर्तन (चेकिंग) और सड़क सुरक्षा की कमान संभालने वाला परिवहन विभाग खुद मैनपावर की भारी कमी से जूझ रहा है।
विभाग की हालत यह है कि वर्तमान में 51 प्रतिशत से अधिक पद खाली पड़े हैं और पूरा अमला महज 822 अधिकारियों व कर्मचारियों के भरोसे रेंग रहा है।
इस गंभीर स्थिति को सुधारने के लिए परिवहन आयुक्त कार्यालय ने आखिरकार 15 साल बाद काडर रिव्यू का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे जल्द ही वित्त विभाग और कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
महत्वपूर्ण पद हैं रिक्त (01.06.2026 की स्थिति में)
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, फील्ड से लेकर दफ्तर तक खाली पड़े पदों ने परिवहन विभाग की कमर तोड़ दी है।
आरटीओ (द्वितीय श्रेणी): क्षेत्रीय/अतिरिक्त परिवहन अधिकारी के सभी 38 स्वीकृत पद खाली पड़े हैं। यही वजह है कि जिलों में प्रभारियों के भरोसे काम चल रहा है।
एमवीएसआई (मोटरयान परिवहन उप निरीक्षक): फिटनेस और तकनीकी जांच से जुड़े इस कैडर के सभी 35 पद रिक्त हैं। (हालांकि, इनकी पूर्ति के लिए पीएससी द्वारा विज्ञापन जारी किया जा चुका है)।
परिवहन निरीक्षक (गैर तकनीकी): कुल 70 स्वीकृत पदों में से 65 खाली हैं, फील्ड में महज 5 लोग ही काम कर रहे हैं।
एआरटीओ: स्वीकृत 64 पदों में से 23 पद खाली पड़े हैं।
प्रधान आरक्षक व वाहन चालक: 120 पदों में से 94 पद रिक्त हैं।
लिपिक वर्ग (सहायक वर्ग-2 व 3): ऑफिस का काम संभालने वाले सहायक वर्ग-2 के 168 में से 123 पद और सहायक वर्ग-3 के 285 में से 78 पद खाली हैं।
कैसे बदलेगी विभाग की सूरत?
परिवहन विभाग में वर्ष 2011 के बाद से नए पदों का सृजन नहीं किया गया है, जबकि इस दौरान सड़कों पर गाड़ियों का दबाव असाधारण रूप से बढ़ा है। अब नए प्रस्ताव के जरिए विभाग को पुनर्जीवित करने की तैयारी है।
ये होगा सुधार : काडर रिव्यू के प्रस्ताव में वर्तमान स्वीकृत पदों (1696) में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी का सुझाव दिया गया है। यदि इसे कैबिनेट से हरी झंडी मिलती है, तो विभाग में 339 नए पद सृजित होंगे।
इससे कुल स्वीकृत पदों का ढांचा 2000 के पार पहुंच जाएगा, जिससे 2.42 करोड़ वाहनों के प्रबंधन और राजस्व वसूली के लिए विभाग को पर्याप्त मैनपावर मिल सकेगी।