भारत में तामिर मिसाइल बनाने की तैयारी में इजरायल, ईरान युद्ध के बीच मास्टरस्ट्रोक, जानें वजह

Updated on 21-07-2026 01:21 PM
तेल अवीव: इजराइल अब अपनी आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम से लॉन्च होने वाली तामिर इंटरसेप्टर मिसाइलों का भारत में प्रोडक्शन करने की योजना बना रहा है। इन मिसाइलों को 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम के तहत बनाया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक ये फैसला मिसाइलों को बनाने में आने वाली लागत को कम करना नहीं है बल्कि युद्ध के माहौल में तामिर मिसाइलों के सप्लाई चेन को मजबूत करना है।
रिपोर्ट के मुताबिक आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम बनाने वाली इजरायली कंपनी 'राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम' ने भारत में तामिर मिसाइल का प्रोडक्शन करने की योजना को अंतिम रूप दे दिया है। ये भारत और इजरायल के बीच गहरी होती रणनीतिक साझेदारी को दिखाता है। ऐसा करने से तामिर मिसाइलों का तेजी से प्रोडक्शन हो सकेगा जिससे सप्लाई चेन में आने वाली रूकावट का समधान हो सकेगा। इससे भारत दुनिया के सबसे कामयाब शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम में से एक आयरन डोम के लिए एक महत्वपूर्ण मैन्युफैक्चरिंग हब बन सकता है।

इजरायल भारत में तामिर मिसाइलों का क्यों करना चाहता प्रोडक्शन?

दरअसल युद्ध के दौरान इजरायल को तामिर मिसाइलों की भारी संख्या की जरूरत महसूस हो रही है। कम प्रोडक्शन क्षमता की वजह से लगातार बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने में दिक्कतें महसूस हो रही हैं। इसके अलावा दुश्मन की मिसाइलें भी उन फैक्ट्रियों पर हमला कर सकती हैं जहां इन मिसाइलों का प्रोडक्शन होता है। इसीलिए इजरायल की कोशिश अपने देश से बाहर प्रोडक्शन हब बनाने की है ताकि सप्लाई चेन लगातार बनी रहे।इज़राइल ने पहले ही अमेरिका के साथ सहयोग करके अपनी सीमाओं से बाहर तामिर का प्रोडक्शन बढ़ाया है। राफेल और रेथियॉन के बीच जॉइंट वेंचर जिसे रेथियॉन राफेल एरिया प्रोटेक्शन सिस्टम्स (R2S) के नाम से जाना जाता है वो अमेरिका में मिसाइल कंपोनेंट बनाता है और आयरन डोम के प्रोडक्शन में मदद करता है। अब भारतीय कंपनियों से भी इसी तरह के समझौते होने की संभावना है। इससे निश्चित तौर पर भारत को टेक्नोलॉजिकल लाभ होगा।

भारत में तामिर मिसाइलों की प्रोडक्शन लागत भी होगी कम

हालांकि तामिर मिसाइल की कीमत कम होती है लेकिन मास प्रोडक्शन अगर भारत में होता है तो लागत और कम हो जाएगी। इजरायल को भारी संख्या में तामिर मिसाइलों की जरूरत है। इसीलिए इसे भारत में बनाने में खर्च और कम हो जाएगा। इजरायल ने भारत में कई तरह के हथियार बनाने शुरू कर दिए हैं। पिछले एक दशक में भारत की कई डिफेंस कंपनियों ने ग्लोबल स्टैंडर्ड के हिसाब से कई विदेशी कंपनियों को पछाड़ दिया है।
भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) जैसी पब्लिक-सेक्टर कंपनियां और निजी डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स की बढ़ती संख्या के पास अब ऐसी क्षमताएं हैं जो एडवांस्ड मिसाइल प्रोडक्शन प्रोग्राम्स में मदद कर सकती हैं। इससे भारत एक मजबूत निर्यातक देश के तौर पर भी उभर सकता है।

भारत में बनी इजरायली मिसाइलों को बेचना आसान

भारत में बनने वाली मिसाइलों को बेचना भी इजरायल के लिए आसान होगा। यूरोप और मध्य पूर्व में हालिया संघर्षों के बाद रॉकेट, ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन को नाकाम करने में सक्षम शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम की मांग तेजी से बढ़ी है। कई देश अपने एयर डिफेंस नेटवर्क को मजबूत करने के लिए ऐसे किफायती सिस्टम की तलाश में हैं जो भारी संख्या में होने वाले हमलों यानि सैचुरेशन अटैक का मुकाबला कर सकें।
लेकिन कई यूरोपीय देशों ने इजरायल के साथ रक्षा सौदा करने से मना कर दिया है। लेकिन अगर इजरायली कंपनी भारत में भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर हथियारों का प्रोडक्शन करे तो फिर कूटनीतिक तौर पर उन हथियारों को बेचना इजरायल के लिए काफी आसान हो जाएगा।

भारत में किन शर्तों के साथ बनेंगी इजरायली मिसाइलें?

रिपोर्ट के मुताबिक तामिर मिसाइलों के प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट के लिए दोनों देशों की सरकारों की मंजूरी आवश्यक होगी। यह प्रोग्राम से जुड़े एक्सपोर्ट कंट्रोल नियमों और द्विपक्षीय समझौतों के दायरे में रहेगा। भारत में मैन्युफैक्चरिंग से इंटरनेशनल डिफेंस सेल्स से जुड़े राजनीतिक पहलू अपने-आप खत्म नहीं हो जाएंगे। यह पहल भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' नीति से काफी हद तक मेल खाती है जो विदेशी डिफेंस कंपनियों को लोकल मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने, जहां जरूरी हो वहां टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने और भारतीय कंपनियों को ग्लोबल सप्लाई चेन में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित करती है।

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