
भोपाल। सिंहस्थ 2028 से पहले भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण इंदौर एयरपोर्ट के रनवे का विस्तार करेगा। इंदौर एयरपोर्ट के विकास एवं विस्तार, रनवे की लंबाई बढ़ाने और टैक्सीवे का निर्माण मास्टर प्लान 2047 के अंतर्गत किया जाएगा। इसके विकास के लिए दो चरणों में 143 एकड़ भूमि अधिग्रहित की जाएगी।
इंदौर एयरपोर्ट के रनवे का विस्तार पहले चरण में 2,754 से बढ़ाकर 3,500 मीटर किया जाएगा। वहीं दूसरे चरण में इसे बढ़ाकर 4,000 मीटर करने की योजना है। इसके साथ ही पैरेलल टैक्सी ट्रेक एवं रिवाइज्ड आइसोलेशन वे का निर्माण भी किया जाएगा। इसके निर्माण से अधिक यात्री क्षमता के बढ़े विमान इंदौर एयरपोर्ट के रनवे पर उतर सकेंगे।
इंदौर एयरपोर्ट का विकास एयरपोर्ट विजन प्लान 2047 के अनुसार किया जाएगा। इसके लिए भूमि अधिग्रहण व लैंड पुलिंग के विकल्प का मूल्यांकन कर प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। लैंड पुलिंग के अंतर्गत 143 एकड़ भूमि एयरपोर्ट के लिए उपलब्ध कराने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। एयरपोर्ट के निकट 60 मीटर पहुंच मार्ग का भी प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
इसके साथ ही भोपाल एयरपोर्ट का भी विकास किया जाएगा। वहीं शिवपुरी और उज्जैन में भी नए एयरपोर्ट की तैयारी तेजी से चल रही है। बता दें कि इंदौर का देवी अहिल्याबाई होल्कर अंततराष्ट्रीय एयरपोर्ट ‘एयरपोर्ट सर्विस क्वालिटी’ सर्वे में 4.90 स्कोर के साथ 16 एशियाई हवाई अड्डों में छठे स्थान पर रहा है। वहीं भोपाल के राजा भोज अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर 24 घंटे संचालन शुरू किया गया है। प्रदेश के सभी हवाई अड्डों पर सुरक्षित, सुगम और बेहतर यात्रा अनुभव सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
इंदौर एयरपोर्ट के लिए अधिग्रहित की जाने वाली 145 एकड़ भूमि में से पांच एकड़ भूमि पर एमएसएसआर-एएसआर रडार इंस्टाल किया जाएगा। इसके लिए विमानन विभाग ने पांच एकड़ भूमि मांगी है। राज्य शासन ने भूमि अधिग्रहण के लिए इंदौर कलेक्टर को निर्देश दिया है कि भूमि के मूल्य का सही आंकलन किया जाए। प्रथम चरण में 89 एकड़ भूमि अधिग्रहण का प्लान तैयार किया जाएगा। द्वितीय चरण के लिए 54 एकड़ भूमि को आरक्षित रखा जाएगा।
इंदौर-देवास-उज्जैन क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के साथ एयरपोर्ट सिटी विकसित की जाएगी। यह परियोजना पीपीपी माडल पर आधारित होगी, जिससे निवेश, व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट पालिसी के माध्यम से निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है, जिससे प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं विकसित होंगी और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।