राफेल नहीं अब फ्रांस के FCAS पर भारत की नजर, बनाएंगे छठी पीढ़ी के फाइटर जेट, न‍िशाने पर चीन-पाक‍िस्‍तान

Updated on 13-08-2026 12:34 PM
पेरिस: फ्रांस से मिले राफेल जेट भारतीय एयरफोर्स का अहम हिस्सा है। फ्रांस के साथ भारत की 114 और राफेल खरीद की चर्चा चलने की बात भी कही गई है। भारत की 4.5 पीढ़ी के इस जेट पर फ्रांस के साथ चर्चा के बीच ऐसी खबर सामने आई है, जो चीन और पाकिस्तान की चिंता बढ़ा सकती है। दरअसल भारत 4.5 पीढ़ी से कहीं आगे बढ़ते हुए छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान हासिल करने की कोशिश में है। यह निश्चित ही चीन-पाकिस्तान जैसे क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों की परेशानी बढ़ाएगा।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट कहती है, भारत की कोशिश फ्रांस के छठी पीढ़ी के फाइटर प्रोग्राम में शामिल होने की है। इसमें एडवांस्ड एयरक्राफ्ट टेक्नोलॉजी से लेकर भविष्य के कॉम्बैट सिस्टम को डिजाइन करने और बनाने का इंडस्ट्रियल काम शामिल है। हालांकि जानकारों का कहना है कि यह फ्रांस के साथ भारत की डिफेंस पार्टनरशिप में एक बड़ा कदम होगा लेकिन इससे कॉम्बैट जेट्स की मौजूदा कमी को दूर करने में बहुत मदद नहीं मिलेगी।

भारत की FCAS में एंट्री की कोशिश

डिफेंस मिनिस्ट्री ने बताया है कि उसने फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम (FCAS) में शामिल होने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। यह फ्रांस के नेतृत्व वाला प्रोग्राम है, जिसका मकसद अगली पीढ़ी के कॉम्बैट एयरक्राफ्ट और उनसे जुड़े हवाई युद्ध सिस्टम विकसित करना है। छठी पीढ़ी के सिस्टम में फाइटर जेट को ड्रोन, सेंसर और डेटा नेटवर्क के साथ जोड़ा जाएगा। इससे एयरक्राफ्ट जानकारी शेयर कर सकें और युद्ध के मैदान में तालमेल बिठा सकें।

इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज में डिफेंस के सीनियर फेलो एंटोनी लेवेस्क का कहना है कि FCAS फ्रांस-भारत रणनीतिक सहयोग के लिए तार्किक कदम और बड़ा बदलाव' है। फिर भी यह इंडियन एयर फोर्स (IAF) की मौजूदा कमी का समाधान नहीं है। यह भारत की मौजूदा एयरक्राफ्ट की कमी को पूरा करने के बारे में नहीं है। बल्कि यह भारत और फ्रांस के बीच भरोसे को नए स्तर पर ले जाने के बारे में है।

भारत के पास जेट की कमी

भारतीय एयरफोर्स (IAF) के पास जरूरी 42 की संख्या के मुकाबले सिर्फ 29 फाइटर स्क्वाड्रन हैं। इससे IAF के पास चीन और पाकिस्तान के साथ संभावित दो-मोर्चे की लड़ाई के लिए जरूरी ताकत का तकरीबन एक-तिहाई हिस्सा कम है। चीन ने अगली पीढ़ी के दो फाइटर प्रोटोटाइप का टेस्ट किया है। इन्हें चेंगदू J-36 और शेनयांग J-50 के नाम से जाना जाता है।

FCAS की शुरुआत में फ्रांस, जर्मनी और स्पेन ने अगली पीढ़ी के कॉम्बैट सिस्टम के तौर पर प्लान किया था। काम के बंटवारे, नेतृत्व और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी को लेकर विवादों के कारण फ्रांस और जर्मनी ने संयुक्त फाइटर प्रोजेक्ट को छोड़ दिया। अब फ्रांस डसॉल्ट के साथ फाइटर के लिए नया रास्ता तलाशेगा, जबकि जर्मनी और स्पेन दूसरे विकल्पों पर विचार करेंगे।

भारत के लिए मौका

यह अनिश्चितता भारत के लिए एक मौका पैदा कर सकती है। हालांकि लेवेस्क ने बताया है कि कोई भी समझौता मुश्किल होगा क्योंकि प्रोग्राम के लिए नए पार्टनर के साथ फंडिंग और काम के बंटवारे पर सहमति की जरूरत होगी। भारत इस प्रोग्राम में मार्केट, टैलेंट और मैन्युफैक्चरिंग का योगदान दे सकता है।

इसमें ये भी ध्यान देने वाली बात है कि भारत पहले से ही अपना स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) विकसित कर रहा है। साथ ही FCAS को उन तकनीकों तक पहुंचने के एक संभावित रास्ते के तौर पर देख रहा है, जो हवाई युद्ध के अगले चरण को तय कर सकती हैं।
दिल्ली स्थित ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के स्ट्रैटेजिक स्टडीज प्रोग्राम के फेलो अतुल कुमार का कहना है कि FCAS में भारत की दिलचस्पी लड़ाकू विमानों की तत्काल कमी को दूर करने पर नहीं है क्योंकि ये विमान 2040 के दशक में ऑपरेशनल हो पाएंगे। आज IAF के सामने दो अहम चुनौतियां हैं- निकट भविष्य में लड़ाकू विमानों की संख्या बढ़ाना और चौथी-पांचवीं पीढ़ी से छठी पीढ़ी के कॉम्बैट एविएशन में तकनीकी बदलाव की तैयारी करना।
रिटायर्ड IAF एयर मार्शल रवि गोपाल कृष्णा कपूर ने कहा कि FCAS 2040 के आसपास ऑपरेशनल हो सकता है, जब AMCA भी IAF की सेवा में शामिल हो सकता है। इससे फोर्स को एक ही समय में पांचवीं और छठी पीढ़ी केलड़ाकू विमानों को शामिल करना होगा। इस समय सीमा में यह लड़ाकू विमानों की ताकत में तत्काल कमी को दूर नहीं कर पाएगा। हालांकि यह IAF को छठी पीढ़ी की क्षमता हासिल करने की राह पर ले जा सकता है।

GCAP के बजाय FCAS क्यों?

रक्षा मंत्रालय ने बताया कि IAF छठी पीढ़ी के दो विकल्पों पर विचार कर रहा है। इनमें ब्रिटिश-इतालवी-जापानी 'ग्लोबल कॉम्बैट एयर प्रोग्राम' (GCAP) भी शामिल है, जो 'टेम्पेस्ट' नाम का अगली पीढ़ी का लड़ाकू विमान बना रहा है। संसदीय रक्षा समिति ने मंत्रालय से छठी पीढ़ी के विमान हासिल करने के रोडमैप और संभावित समय-सीमा पर एक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।
कुमार ने कहा कि FCAS कई देशों वाले GCAP की तुलना में आकर्षक लगता है क्योंकि फ्रांस की तकनीकी आजादी के कारण भारत पर एंग्लो-अमेरिकी हथियारों के निर्यात नियंत्रण का असर कम हो जाता है। भारत में फ्रांसीसी लड़ाकू विमानों के इस्तेमाल से संस्थागत जान-पहचान, तकनीकी विशेषज्ञता, बुनियादी ढांचा और स्थापित औद्योगिक संबंध बने हैं।

कुमार ने कहा कि FCAS साझेदारी आपसी रिश्ते को मजबूत कर सकती है। फ्रांस के पास रणनीतिक और तकनीकी आजादी है। वह भारतीय एयरोस्पेस क्षेत्र में एक भरोसेमंद साझेदार है। इससे FCAS में भारत का भरोसा बढ़ सकता है। इस प्रोग्राम के डिजाइन, विकास और सप्लाई चेन में अपने एयरोस्पेस उद्योग को शामिल करने में भारत की स्थिति मजबूत हो सकती है।

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