UK के 350 की आबादी वाले गांव में 'जनमत संग्रह', गांव वालों ने क्यों की आजादी मांग, जानें

Updated on 16-09-2026 01:24 PM
लंदन: ब्रिटेन के टूटने की संभावना और वेल्स, स्काटलैंड और उत्तरी आयरलैंड के रुख के बीच ऑक्सफोर्डशायर के पिडिंगटन गांव में मंगलवार को आजादी का जनमत संग्रह हुआ है। इंग्लैंड की काउंटी पिंडिगटन के करीब 350 लोगों की आबादी वाले इस गांव में यह वोटिंग पास की एक बंद पड़ी मिलिट्री साइट पर 1,200 से ज्यादा शरण चाहने वालों को बसाने की योजना के विरोध में था। यानी यह एक सांकेतिक जनमत संग्रह था।

विश्वविख्यात ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से 25 किमी दूर इस गांव ने निवासियों से पूछा गया कि क्या उन्हें यूके से अलग होने और आत्म-निर्णय की कोशिश करनी चाहिए। इसके लिए उन्हें हां या नहीं में वोट करना था। इसके लिए उन्होंने मंगलवार को वोट डाला और इसके नतीजे बुधवार को सामने आ जाएंगे। हालांकि इस वोट का कोई कानूनी आधार नहीं है। यह सिर्फ मिलिट्री साइट पर लोगों को बसाने के खिलाफ विरोध के तौर पर किया गया।

क्या है गांव वालों का डर

गांव के लोगों का कहना है कि इस वोटिंग का मकसद उनकी चिंताओं की ओर सरकार का ध्यान खींचना है। 63 साल के ग्रामीण इयान डार्बी ने कहा कि पिडिंगटन प्रवासियों का अपना हिस्सा स्वीकार करने को तैयार है लेकिन प्रस्तावित संख्या बहुत ज्यादा है। सरकार की फैक्टशीट में कहा गया है कि साइट पर 10 साल तक अकेले वयस्क पुरुष शरण चाहने वालों को रखा जाएगा।

ग्रामीणों का कहना है कि यह योजना अव्यावहारिक है क्योंकि पिडिंगटन में सिर्फ एक विलेज हॉल, 12वीं सदी का चर्च और एक खेल का मैदान है। मैकनेली ने कहा कि निवासियों को ज्यादातर शरण चाहने वालों से नहीं बल्कि कुछ लोगों के एक छोटे से समूह से चिंता है, जो ऐसी परेशानी पैदा कर सकते हैं। इसका अंदाजा लगाना या जिसे कंट्रोल करना काफी मुश्किल हो सकता है।

खुला खत भी लिखा

संसद की 266 महिला सांसदों को लिखे एक खुले पत्र में गांव की 133 महिलाओं ने कहा है कि उन्हें अपनी सुरक्षा की चिंता है। 17 वर्षीय छात्रा और पार्ट-टाइम अस्तबल कर्मचारी डीटा जैक्सन इतनी डरी हुई है कि सेल्फ डिफेंस की क्लास ले रही है। वहीं 76 साल के किसान जेनिफर ओवेन ने कहा कि गांव पूरी तरह बदल जाएगा, जिससे वह फिक्रमंद हैं।

यूके के कई हिस्सों में होटलों और दूसरी जगहों पर शरण चाहने वालों को बसाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए हैं। यह हालिया समय में एक एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। इसी महीने छोटी नावों में बिना कागजात वाले प्रवासियों के आने को लेकर दो तटीय बंदरगाहों के पास काले कपड़े पहने नकाबपोश लोगों की पुलिस से झड़प भी हुई है।

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