एक बैठक में तय की 355 निजी कॉलेजों की फीस:मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में आए जवाब से हुआ खुलासा

Updated on 22-07-2026 02:08 PM
भोपाल, मध्य प्रदेश में निजी शिक्षण संस्थानों की फीस निर्धारण प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने भ्रष्टाचार और मनमानी के आरोप लगाए हैं।

विधानसभा में सरकार के जवाब का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति ने चार वर्षों में 5062 निजी शिक्षण संस्थानों की फीस तय की, जबकि एक बैठक में ही 355 संस्थानों का शुल्क निर्धारण कर दिया गया।

उपाध्याय ने सवाल उठाया कि इतने कम समय में आय-व्यय और अन्य दस्तावेजों का गहन परीक्षण कैसे संभव है।

विधानसभा में विधायक पंकज उपाध्याय के प्रश्न के लिखित उत्तर में तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति ने वर्ष 2022 से 2025-26 तक 5062 निजी शिक्षण संस्थानों का शुल्क निर्धारण किया है।

सरकार ने यह भी बताया कि चार्टर्ड अकाउंटेंट अधिकतम 15 दिन में आवेदन का परीक्षण कर अपनी रिपोर्ट समिति को देता है, जिसके आधार पर फीस निर्धारण किया जाता है।

सरकार के इस जवाब के बाद पंकज उपाध्याय ने शुल्क निर्धारण की पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि उनके मूल प्रश्न का यह हिस्सा अनुत्तरित रहा कि चार्टर्ड अकाउंटेंट ने कितने दिनों में कितने आवेदनों का परीक्षण किया। उनका कहना है कि राजपत्र, 2008 के प्रावधानों के अनुसार चार्टर्ड अकाउंटेंट को किसी भी शिक्षण संस्थान के आय-व्यय, तुलनापत्र और अन्य वित्तीय दस्तावेजों का गहन परीक्षण करना होता है तथा आवश्यकता पड़ने पर संस्थान से स्पष्टीकरण भी लेना पड़ता है। ऐसे में प्रतिदिन बड़ी संख्या में आवेदनों का परीक्षण व्यावहारिक नहीं लगता।

एक ही बैठक में 355 निजी संस्थानों की फीस तय

उपाध्याय ने आरोप लगाया कि वर्ष 2025-26 के दौरान एक ही बैठक में 355 निजी शिक्षण संस्थानों की फीस तय कर दी गई। उन्होंने कहा कि समिति को निरीक्षण दल की रिपोर्ट, विभाग के चार्टर्ड अकाउंटेंट की रिपोर्ट और संस्थानों के आय-व्यय का परीक्षण करने के बाद ही निर्णय लेना होता है। ऐसे में एक दिन में इतनी बड़ी संख्या में संस्थानों का शुल्क निर्धारण गंभीर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने नर्सिंग कॉलेजों का मुद्दा भी उठाते हुए कहा कि हर वर्ष 60 से 100 नर्सिंग संस्थानों की फीस निर्धारित की जाती है, जबकि इनमें से कई संस्थानों के नियमों के विपरीत संचालित होने के आरोप पहले से सामने आते रहे हैं। उन्होंने पूछा कि ऐसे संस्थानों के संबंध में चार्टर्ड अकाउंटेंट और निरीक्षण दल ने क्या परीक्षण किया तथा किन मानकों के आधार पर उनका शुल्क निर्धारित किया गया।

पंकज उपाध्याय ने निजी शिक्षण संस्थानों की फीस निर्धारण प्रक्रिया की सीबीआई या किसी उच्च स्तरीय समिति से जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि शिक्षा के नाम पर मुनाफाखोरी पर रोक लगाई जानी चाहिए और समान पाठ्यक्रम के लिए पूरे प्रदेश में एक समान शुल्क व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।



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