नेपाल को ब्लैक लिस्ट कर सकता है FATF, बालेन सरकार को लग सकता है बहुत बड़ा झटका, दिया अल्टीमेटम

Updated on 19-05-2026 12:16 PM
काठमांडू: फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने नेपाल को ब्लैक लिस्ट करने की चेतावनी दी है। एफएटीएफ जो मनी लॉन्ड्रिंग रोकने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था है वो आतंकवादी संगठनों को विभिन्न स्रोतों से होने वाली फंडिंग पर गहरी नजर रखती है। इसने नेपाल को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वह वित्तीय अपराधों में सुधार के मामले में पर्याप्त प्रगति दिखाने में नाकाम रहता है तो उसे ब्लैक लिस्ट में डाला जा सकता है। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक ये चेतावनी फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की क्षेत्रीय शाखा एशिया/पैसिफिक ग्रुप (APG) ने नेपाल सरकार को दी है।

रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल सरकार के पास करीब चार महीने का वक्त है। पोस्ट ने बताया है कि APG ने काठमांडू की अपनी मौजूदा यात्रा को सितंबर 2026 में AP-JG की तरफ से की जाने वाली निर्णायक समीक्षा से पहले का 'अंतिम उच्च-स्तरीय हस्तक्षेप' बताया है। इसका मतलब है कि नेपाल के पास ठोस नतीजे दिखाने के लिए अब चार महीने से भी कम का समय बचा है। पोस्ट के मुताबिक ये हालात कितने गंभीर हैं इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि APG ने काठमांडू किसे भेजा है। इस प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई डिप्टी एग्जीक्यूटिव सेक्रेटरी डेविड शैनन कर रहे हैं जो 2002 से ही APG सचिवालय से जुड़े हुए हैं और फिलहाल अपना 24वां 'म्यूचुअल इवैल्यूएशन' (आपसी मूल्यांकन) कर रहे हैं।

FATF से नेपाल पर ब्लैक लिस्ट होने का खतरा मंडराया

डेविड शैनन को दुनिया के सबसे अनुभवी FATF समीक्षकों में से एक माना जाता है। उनकी वरिष्ठता का कोई अधिकारी खुद इस यात्रा पर आया है जो इस बात का संकेत है कि नेपाल के हालात कितने गंभीर हो चुके हैं। पोस्ट के मुताबिक रविवार को काठमांडू पहुंचे इस प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को 'प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद कार्यालय' में सरकार के मनी लॉन्ड्रिंग-रोधी तंत्र से जुड़े विभिन्न अधिकारियों के साथ बैठकें कीं।

इन बैठकों में वित्त मंत्रालय, गृह मंत्रालय, कानून मंत्रालय, अटॉर्नी जनरल कार्यालय, नेपाल सेना, नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल, नेपाल राष्ट्र बैंक और मनी लॉन्ड्रिंग जांच विभाग के अधिकारी शामिल थे। इन बैठकों में शामिल रहे एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर 'कांतिपुर' को बताया कि APG के अधिकारियों ने नेपाल के मनी लॉन्ड्रिंग रोकने की कोशिशों को लेकर अपनी असंतुष्टि को बेहद स्पष्ट शब्दों में जाहिर कर दिया।

FATF से ब्लैक लिस्ट होने के कगार पर कैसे पहुंचा नेपाल?

  • FATF ने वित्तीय अपराधों को रोकने में नाकाम रहने के कारण फरवरी 2025 में नेपाल को 'ग्रे लिस्ट' में डाल दिया था।
  • ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने और 15 विशिष्ट निर्देशों को लागू करने के लिए नेपाल को 2027 तक का समय दिया गया था।
  • काठमांडू में आयोजित बैठक के दौरान APG सचिवालय के एक गोपनीय ब्रीफिंग नोट में नेपाल की प्रगति को "बेहद निराशाजनक" बताया गया है।
  • APG ने जांच, मुकदमों और व्यावहारिक परिणामों में हो रही देरी पर गहरी असंतुष्टि जताई है।

FATF ने नेपाल की किन कमजोरियों को पकड़ा है?

  • FATF ने अपनी जांच में पाया है कि मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में नेपाल के विभिन्न विभागों जैसे मनी लॉन्ड्रिंग जांच विभाग, नेपाल पुलिस, और भ्रष्टाचार जांच आयोग की तरफ से दर्ज किए गए मामले बेहद कम और अपर्याप्त हैं। कानून प्रवर्तन और जांच में ढिलाई देखने को मिला है।
  • नेपाल रियल एस्टेट, सहकारी समितियों, कैसिनो और मूल्यवान धातुओं (सोने-चांदी) के व्यापार जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में अवैध वित्तीय गतिविधियों को रोकने में पूरी तरह नाकाम रहा है।
  • नेपाल सरकार के अधिकारियों का कहना है कि देश में लगातार होते राजनीतिक बदलाव, आम चुनाव और सरकारों के बदलने के कारण ये जरूरी सुधार जमीन पर लागू नहीं हो सके।
  • कार्ययोजना के तहत नेपाल को नवंबर 2025 तक एक 'नेशनल रिस्क असेसमेंट रिपोर्ट' तैयार करनी थी लेकिन विभिन्न सेक्टर्स की सुस्ती की वजह से यह रिपोर्ट अब तक अधूरी है।

नेपाल अगर FATF से ब्लैक लिस्ट होता है तो क्या होगा?

  • एफएटीएफ से ब्लैक लिस्ट होना देश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ सकता है। नेपाल को अंतर्राष्ट्रीय बैंकों से कर्ज लेने में काफी परेशानी होगी। उसे काफी मुश्किल शर्तों के साथ ऋण मिलेंगे जिससे देश में कारोबार करना अत्यंत मुश्किल हो जाएगा।
  • देश की वित्तीय साख गिरने से विदेशी निवेशक और बहुराष्ट्रीय कंपनियां नेपाल में निवेश करने से कतराएंगी। FDI पर इसका सीधा असर होगा।
  • वर्ल्ड बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और एशियाई विकास बैंक जैसे वैश्विक संगठनों से नेपाल को लोन मिलना काफी मुश्किल हो जाएगा। अगर मिलती भी हैं तो ब्याज की दरें काफी ज्यादा होंगी।

नेपाल के पास अभी भी 4 महीने का वक्त बचा हुआ है। अगर नेपाल सरकार पूरी ताकत से काम करती है और कमियों को सुधारने की दिशा में कदम उठाती है तो हो सकता है कि ब्लैक लिस्ट का साया देश से हट जाए। सितंबर 2026 में नेपाल को लेकर समीक्षा बैठक होने वाली है और उससे पहले नेपाल सरकार को दिखाना होगा कि मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े बड़े मामलों में सख्त कार्रवाई की जा रही है। अन्यथा वो उत्तर कोरिया, पाकिस्तान, ईरान और म्यांमार जैसे देशों की फेहरिस्त में शामिल हो सकता है।

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