खतरे में MP के डेढ़ लाख से अधिक शिक्षकों की पात्रता, मामले में सियासत शुरू, सीएम ने पुनर्विचार याचिका व अन्य विकल्पों पर विचार के दिए निर्देश

Updated on 14-04-2026 11:25 AM

भोपाल। मध्य प्रदेश के डेढ़ लाख से अधिक शिक्षकों पर पात्रता की तलवार लटक रही है। इनमें वे शिक्षक शामिल हैं, जिनकी नियुक्तियां 2005 के पहले हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा की गुणवत्ता के लिए पात्रता परीक्षा लेने के निर्देश दिए हैं, जिसका शिक्षक विरोध कर रहे हैं।

इन शिक्षकों का कहना है कि जब जो प्रविधान थे, उसके अनुरूप हमारी भर्ती हुई तो फिर हम परीक्षा क्यों दें। इस मामले पर प्रदेश में सियासत भी होने लगी है।

कांग्रेस इसे मुद्दा बनाने में जुट गई है

होशंगाबाद सीट से भाजपा सांसद दर्शन सिंह चौधरी और पूर्व विधायक मुरलीधर पाटीदार शिक्षकों की भावना के साथ जुड़े हैं तो कांग्रेस इसे मुद्दा बनाने में जुट गई है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार स्पष्ट कर चुके हैं कि पात्रता परीक्षा शिक्षकों के साथ अन्याय है।

कानूनी पहलुओं का अध्ययन कराया जाएः सीएम

उधर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निर्देश दिए हैं कि कानूनी पहलुओं का अध्ययन कराया जाए। पुनर्विचार याचिका के साथ अन्य विकल्पों पर विचार करें। वहीं, शासकीय शिक्षक संघ के कार्यकारी प्रांताध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने बताया कि संगठन से जुड़े शिक्षकों ने संचालनालय के पात्रता परीक्षा संबंधी आदेश और शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने के पूर्व नियुक्त शिक्षकों को पात्रता परीक्षा से मुक्त रखने के संबंध में याचिका दायर की है।

18 अप्रैल को जंबूरी मैदान में शिक्षक एकत्र होंगे

18 अप्रैल को भोपाल में अपनी आवाज बुलंद करने के जंबूरी मैदान में शिक्षक एकत्र हो रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार से मांग की है कि वह इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करे।

वहीं, स्कूल शिक्षा विभाग पूरे मामले में दो स्तर पर काम कर रहा है। एक तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश की रोशनी में परीक्षा को लेकर तैयारी की जा रही है तो दूसरी ओर पुनर्विचार याचिका या अन्य विकल्प पर विधिक परामर्श लिया जा रहा है।

प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2010 में लागू हुआ

2006, 2009 और 2010 के पहले जो भर्तियां हुईं, उनकी व्यवस्था स्थानीय स्तर पर थी। प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2010 में लागू हुआ। इसके अनुसार 2013 से पात्रता परीक्षा हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने अधिनियम के प्रविधान अनुसार शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षकों की योग्यता के दृष्टिगत पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता की बात कही है।
इसके आधार पर वे सभी शिक्षक जो पात्रता परीक्षा के माध्यम से सेवा में नहीं आए, उनकी पात्रता पर तलवार लटक गई। लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से ऐसे शिक्षकों की जानकारी मांगी है।


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