ब्रह्मोस के डर से पाकिस्तान ने हताशा में लॉन्च की 'सुपरसोनिक' मिसाइल Fatah-3, भारत को चुनौती दे पाएगा?

Updated on 08-05-2026 11:48 AM
इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने पिछले साल मई संघर्ष के बाद दर्जन भर मिसाइल टेस्ट करने के दावे किए हैं। एनबीटी ऑनलाइन से भारतीय सुरक्षा सूत्रों ने कहा है कि कुछ मिसाइल टेस्ट असल में हुए ही नहीं हैं और वो सिर्फ एआई वीडियो हैं। ये पाकिस्तान के डर को दिखाता है और वो मनोवैज्ञानिक युद्ध कर रहा है। खैर पाकिस्तान ने अबकी बार फतह-3 नाम के सुपरसोनिक मिसाइस का टेस्ट करने की बात कही है। पाकिस्तान समर्थित सोशल मीडिया हैंडल्स और एक्सपर्ट्स इसे एक बड़ी उपलब्धि बता रहे हैं और उसकी तुलना भारतीय ब्रह्मोस मिसाइल से कर रहे हैं जिसने पिछले साल पाकिस्तान के 11 एयरबेस पर धमाके किए थे।

पाकिस्तान की सेना ने 7 मई को FATAH-3 सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का अभूतपूर्व सार्वजनिक टेस्ट करने की बात कही है। इसका दावा है कि ये एक तेज रफ्तार से चलने वाली सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। क्रूज मिसाइल बनाना बच्चों का खेल नहीं है और चीन भी ब्रह्मोस की बराबरी का मिसाइल अभी तक नहीं बना पाया है और पाकिस्तान ने एक साल में इसका परीक्षण करने की भी दावा कर डाला। ऐसे में समझा जा सकता है कि पाकिस्तान की मिलिट्री लीडपरशिप कितनी ज्यादा हताश है भले ही वो अपनी जनता के सामने दिन भर डींगे क्यों ना हांगे।

चीनी मिसाइल पर आधारित है FATAH-3 मिसाइल

फतह-3 मिसाइल चीन के HD-1 सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल परिवार का हिस्सा माना जाता है। इसका पाकिस्तान ने स्थानीय प्रोडक्शन किया है। पाकिस्तान का दावा है कि ये भारतीय ब्रह्मोस के वर्चस्व को चुनौती देगा। वहीं आईडीआरडब्ल्यू के मुताबिक पाकिस्तान ने 'गुआंगडोंग होंगडा ब्लास्टिंग' नाम की एक चीनी माइनिंग कंपनी से HD-1 नाम की रैमजेट प्रोपल्शन मिसाइल खरीदी है।"

इसने लिखा है कि "आपने बिल्कुल सही सुना। यह भारत की ब्रह्मोस मिसाइल की बराबरी करने की उसकी हताशा का नतीजा है। FATAH-3 (जो HD-1 का ही एक रूप है) में सॉलिड-फ्यूल रैमजेट लगा है जिसकी मदद से यह Mach 2.5 से 4.0 तक की गति हासिल कर सकती है। यह ब्रह्मोस मिसाइल के मुकाबले काफी हल्की है लेकिन इसकी मारक क्षमता (रेंज) 290 किलोमीटर तक ही सीमित रहेगी। ऐसे में यह भारत के अंदरूनी इलाकों में मौजूद किसी भी लक्ष्य को भेदने में नाकाम रहेगी।"OSINT रिसर्चर्स ने FATAH-3 मिसाइल को चीनी HD-1 मिसाइल ही बताया है। जिससे चीन-पाकिस्तान मिसाइल टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन और ऑपरेशनल इंटरऑपरेबिलिटी के बारे में लगातार आकलन को बल मिला। पाकिस्तान का दावा है कि क्रूज क्षमता होने की वजह से ये मिसाइल जमीन से काफी नीचे उड़ान भरेगी और काफी ज्यादा स्पीड की वजह से एयर डिफेंस सिस्टम्स के लिए इसे इंटरसेप्ट करना मुश्किल होगा। बात सही है क्रूज मिसाइल को इंटरसेप्ट करना काफी मुश्किल है लेकिन वो निर्भर करता है कि क्रूज मिसाइल की क्षमता कितनी है। फतह-3 कोई ब्रह्नोस नहीं है।
ब्रह्मोस के मुकाबले कहां ठहरती फतह-3 क्रूज मिसाइल?
  • स्पीड और टेक्नोलॉजी- ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है और पूरी उड़ान के दौरान इसकी स्पीड 2.8 से 3.0 मैक की स्पीड बनाए रखती है। जबकि पाकिस्तानी फतह-3 एक हल्की मिसाइल है और ये चीन की HD-1 तकनीक पर आधारित है जिसके ऑपरेशन आंकड़े ब्रह्मोस के बराबर नहीं है।
  • मारक क्षमता- ब्रह्मोस मिसाइल की रेंज 300 किमी से 500 किमी तक है और इसे 800 किमी तक बढ़ाने पर काम चल रहा है। यह अपनी 'फायर एंड फॉरगेट' तकनीक और मात्र 1 मीटर के सटीक घेरे (CEP) के लिए प्रसिद्ध है। फतह का वजन 1.2-1.5 टन है और 250 किलोग्राम तक का वॉरहेड ले जा सकती है। इसकी रेंज 290 किलोमीटर ही है।
  • ब्रह्मोस दुनिया की एकमात्र ऐसी मिसाइल है जिसे जमीन, समुद्र (युद्धपोत और पनडुब्बी) और हवा (सुखोई-30MKI) तीनों जगहों से सफलतापूर्वक दागा जा सकता है। फतह को पाकिस्तान अपनी सेना के रॉकेट फोर्स कमांड के तहत तैनात कर रहा है। हालांकि भविष्य में इसके अन्य वेरिएंट्स की योजना भी हो सकती है।
  • ब्रह्मोस एक युद्ध में परखी मिसाइल है जबकि फतह-3 का अभी अलग अलग वातावरण में टेस्ट होना है।

चीनी HD-1 एक कम तकनीक वाली मिसाइल है और ये काफी सस्ती भी है। ब्रह्मोस एक महंगी मिसाइल है। इसीलिए ये पाकिस्तान की हताशा को दिखाता है कि जल्दबाजी में हथियार जुटाने के लिए पाकिस्तान कितना हाथ पैर मार रहा है। अंतरराष्ट्रीय नियमों (MTCR) के कारण चीन 300 किमी से अधिक रेंज वाली मिसाइल तकनीक नहीं बेच सकता। 290 किमी की रेंज का मतलब है कि यदि पाकिस्तान इसे अपनी सीमा के पास से भी दागता है तो यह भारत के गहरे अंदरूनी शहरों (जैसे दिल्ली, मुंबई या मध्य भारत) तक नहीं पहुंच पाएगी। यह मिसाइल सिर्फ सीमा के पास स्थित सैन्य ठिकानों या अग्रिम चौकियों के लिए ही खतरा बन सकती है।

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