MP में अदालतों की डिजिटल क्रांति, अब फोटो-वीडियो बनेंगे सबूत, ई-साक्ष्य नियम-2026 लागू

Updated on 29-06-2026 12:56 PM

मध्य प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था अब डिजिटल युग में एक बड़ा कदम रखने जा रही है। प्रदेश सरकार ने अदालतों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के उपयोग को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए ई-साक्ष्य प्रणाली लागू कर दी है। इसके साथ ही मप्र इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्डिंग नियम-2026 का गजट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद फोटो, ऑडियो और वीडियो जैसे डिजिटल साक्ष्य अदालतों में बिना अलग से प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए सीधे कानूनी सबूत के रूप में स्वीकार किए जा सकेंगे। यह व्यवस्था भारतीय साक्ष्य अधिनियम-2023 के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

ई-साक्ष्य पोर्टल से जुड़ेगा पूरा सिस्टम

गृह विभाग द्वारा जारी नियमों के अनुसार ई-साक्ष्य प्रणाली इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) के माध्यम से संचालित होगी। यह व्यवस्था प्रदेश की सभी जिला अदालतों और अधीनस्थ न्यायालयों में लागू रहेगी। सरकार का मानना है कि इससे साक्ष्य जुटाने और उन्हें अदालत तक पहुंचाने की प्रक्रिया अधिक तेज, सुरक्षित और पारदर्शी बनेगी।

हाई कोर्ट की सलाह पर तैयार हुए नियम

राज्य सरकार ने इन नियमों को अंतिम रूप देने से पहले हाई कोर्ट से परामर्श लिया। वहीं, नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) ने इसके लिए विशेष ई-साक्ष्य ऐप तैयार किया है। इस ऐप की मदद से पुलिस घटनास्थल पर ही रियल टाइम वीडियो, फोटो और गवाहों के बयान रिकॉर्ड कर सकेगी। रिकॉर्डिंग होते ही डिजिटल डेटा सुरक्षित रूप से सिस्टम में अपलोड हो जाएगा, जिससे सबूतों से छेड़छाड़ की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी।

क्या बदलेगा नई व्यवस्था में

  • नई प्रणाली लागू होने के बाद डिजिटल साक्ष्यों के लिए पहले की तरह 65B प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं होगी। ई-साक्ष्य ऐप से रिकॉर्ड किए गए फोटो, वीडियो और ऑडियो सीधे न्यायालय में स्वीकार किए जा सकेंगे।
  • इसके अलावा हर डिजिटल रिकॉर्ड का डिजिटल फिंगरप्रिंट (हैश वैल्यू) तैयार होगा। यदि रिकॉर्ड में किसी तरह की एडिटिंग या छेड़छाड़ की जाती है तो सिस्टम तुरंत इसकी पहचान कर लेगा।
  • एक और बड़ा बदलाव यह होगा कि जांच के दौरान पीड़ित या गवाह का मूल मोबाइल या लैपटॉप लंबे समय तक जब्त रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। प्रमाणित डिजिटल कॉपी के आधार पर भी न्यायालय साक्ष्य स्वीकार कर सकेगा।

तेजी से होगी सुनवाई और जांच

अब तक पुलिस, फॉरेंसिक लैब और अदालतों के बीच दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड के आदान-प्रदान में कई सप्ताह या महीनों का समय लग जाता था। नई प्रणाली के तहत पुलिस द्वारा अपलोड किए गए साक्ष्य कुछ ही घंटों में फॉरेंसिक लैब और अदालत तक पहुंच जाएंगे। इससे लंबित मामलों की सुनवाई में तेजी आने की उम्मीद है।

सुरक्षा और गोपनीयता पर विशेष जोर

सरकार ने ई-साक्ष्य प्रणाली में सुरक्षा के लिए कड़े प्रावधान किए हैं। केवल अधिकृत अधिकारी और संबंधित पक्ष ही रिकॉर्ड देख सकेंगे। किसी भी प्रकार की अनधिकृत पहुंच, फर्जी डेटा अपलोड करने या डिजिटल रिकॉर्ड से छेड़छाड़ करने पर सख्त दंड और जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। सरकार का दावा है कि यह व्यवस्था न्यायिक प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाएगी।



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