भारत क्यों नहीं लौटना चाहते NRI? इस शख्स ने श्रीधर वेम्बु को चुन-चुनकर बताए कारण, कहा- सिर्फ 'वतन प्रेम' काफी नहीं
Updated on
29-04-2026 01:20 PM
नई दिल्ली: जोहो (Zoho) के फाउंडर श्रीधर वेम्बु ( Sridhar Vembu ) की ओर से अमेरिका में बसे भारतीयों से वतन वापसी की अपील के बाद एक नई बहस छिड़ गई है। शिकागो स्थित निवेशक विनीत के (Vineeth K) ने वेम्बु के 'ओपन लेटर' का जवाब देते हुए उन बुनियादी कारणों को गिनाया है, जिनकी वजह से प्रवासी भारतीय ( NRI ) विदेश में ही रुकना पसंद करते हैं।
विनीत के अनुसार, अब बात केवल ज्यादा पैसों की नहीं रह गई है, बल्कि यह बेहतर जीवनशैली और विश्वसनीय व्यवस्था से जुड़ी है। विनीत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में उन एनआरआई लोगों का अनुभव शेयर किया है जिन्होंने विदेश में रहने का फैसला किया है। उन्होंने इसके पीछे कई बुनियादी कारण बताए:
भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था: उन्होंने लिखा है कि रोजमर्रा के जीवन में कम भ्रष्टाचार है। साथ ही बुनियादी सेवाओं के लिए जुगाड़ या पहचान पर निर्भरता कम है।
बेहतर बुनियादी ढांचा: अमेरिका में साफ-सुथरे शहर, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और बिना टेंशन वाली सड़कें हैं।
अनुशासन और सुरक्षा: बेहतर नागरिक अनुशासन और आपात स्थिति के दौरान मजबूत सुरक्षा तंत्र है।
स्थिरता: विनीत ने कहा कि यह विलासिता नहीं, बल्कि बुनियादी जीवन जीने का तरीका है। वहां सिस्टम अधिक पूर्वानुमानित और स्थिर है।
'सिर्फ वतन प्रेम काफी नहीं'
विनीत ने सीधे सवाल किया कि आखिर प्रवासियों के पास वापस लौटने के लिए क्या प्रोत्साहन है? उन्होंने कहा, 'हम आखिर कब तक सिर्फ मातृभूमि की भावना का हवाला देकर लोगों से लौटने की उम्मीद करते रहेंगे? कई लोगों ने भारत को पीछे नहीं छोड़ा है, बल्कि उन्होंने एक ऐसी जगह अपना जीवन बनाया है जहां सिस्टम उन्हें स्थिरता देता है।'उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जो लोग भारत में रह रहे हैं, उन्हें बाहर वालों को वापस बुलाने के बजाय देश की घरेलू चुनौतियों को ठीक करने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों रास्ते महत्वपूर्ण हैं। दोनों तरह का योगदान मूल्यवान है।
क्या था श्रीधर वेम्बु का प्रस्ताव?
श्रीधर वेम्बु ने हाल ही में अमेरिका में रह रहे भारतीयों को एक खुला पत्र लिखा था। उन्होंने तर्क दिया था कि देश को अपनी युवा आबादी का मार्गदर्शन करने के लिए अनुभवी प्रतिभाओं की जरूरत है। उन्होंने प्रवासियों से अपील की थी कि वे वापस आएं और भारत के तकनीकी नेतृत्व में योगदान दें। उन्होंने लिखा था कि भारत की वैश्विक स्थिति और समृद्धि तकनीकी ताकत पर निर्भर करेगी।
सोशल मीडिया पर बहस
इस संवाद ने इंटरनेट पर एक बड़ी चर्चा को जन्म दे दिया है। एक तरफ वे लोग हैं जो मानते हैं कि प्रतिभा का देश वापस आना विकास के लिए जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ विनीत के तर्कों से सहमत लोग कह रहे हैं कि जब तक भारत में 'क्वालिटी ऑफ लाइफ' और 'सिविक सेंस' में सुधार नहीं होता, तब तक केवल भावनात्मक अपीलों से कुशल लोगों को वापस लाना मुश्किल होगा।
नई दिल्ली: भारतीय रेल (Indian Railways) की ट्रेन में आप अक्सर यात्रा करते होंगे। उसमें आप ऐसी ढेरों चीजें नोट करते होंगे जो कि किसी 'ग्राहक के अधिकार' के विपरीत…
नई दिल्ली: टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा स्टील जर्मनी की कंपनी मार्ट्रेड के साथ अपनी 25 साल पुरानी पार्टनरशिप खत्म करने जा रही है। दोनों कंपनियों ने 2001 में जॉइंट…
नई दिल्ली: कंपनियां अब अपने कर्मचारियों के स्वास्थ्य का ख्याल रखने के लिए पुराने ढर्रे के इंश्योरेंस से आगे बढ़ रही हैं। अब साधारण मेडिकल इंश्योरेंस के अलावा कैंसर जैसी…
मुंबई: गुजरात की एक एफएमसीजी कंपनी है गोकुल एग्रो रिसोर्सेज (Gokul Agro Resources)। इसके शेयर गुरुवार को ट्रेडिंग शेसन के दौरान NSE पर 7% से ज़्यादा चढ़ गए। विभिन्न तरह…
नई दिल्ली: मेटल और माइनिंग सेक्टर की दिग्गज कंपनी वेदांता के शेयरों में आज शुरुआती कारोबार में एक फीसदी से ज्यादा गिरावट आई। BSE पर कंपनी का शेयर पिछले सत्र…
अगस्त का महीना अपने साथ कई बदलाव लेकर आ रहा है। इसमें रेलवे के तत्काल टिकट बुकिंग से जुड़े नियम, एलपीजी सिलेंडर की कीमत, विंडफॉल टैक्स, ITR डेडलाइन, क्रेडिट कार्ड…