दूसरे नेताओं को CM बनाने वाले PK खुद क्यों नहीं बन पाए? जनसुराज कैसे जीरो पर बोल्ड हुई

Updated on 09-05-2026 12:11 PM
पटनाः तमिलनाडु में फिल्म स्टार जोसेफ विजय की (थलपति विजय) की रिकॉर्ड तोड़ जीत के बाद बिहार के प्रशांत किशोर (पीके) भी चर्चा में हैं। कहा जा रहा है कि विजय की इस जीत में प्रशांत किशोर और उनकी संस्था आइ-पैक (I-PAC) का बहुत बड़ा हाथ है। जब प्रशांत किशोर की इस उपलब्धि पर चर्चा होती है तो जेहन में एक ही सवाल उठता है कि दूसरे दलों को जीत दिलाने वाले प्रशांत किशोर खुद अपना चुनाव क्यों नहीं जीत पाये? अन्य नेताओं के मुख्यमंत्री बनाने वाले प्रशांत खुद क्यों नहीं मुख्यमंत्री बन पाये? पूरे बिहार में दो साल तक अथक मेहनत से पदयात्रा की, जनसुराज के नाम से नयी पार्टी बनायी। फिर वे खुद क्यों नहीं चुनाव जीत पाये ? अगर उनका काम चुनावी जीत की गारंटी है तो ये बात खुद उन पर क्यों नहीं लागू हो पायी ?

पीके केवल जीतने वाले घोड़े पर दांव लगाते हैं !


कहा जाता है कि प्रशांत किशोर उसी नेता पर दांव लगाते हैं जिसकी जीत की संभावना होती है। वे उस नेता का काम स्वीकार नहीं करते जो लोकप्रियता के पायदान पर सबसे नीचे खड़ा हो। जब वे जदयू के नेता थे तो 2019 में वे अपनी पार्टी को झारखंड में जीत नहीं दिला सके थे। चूंकि झारखंड में जदयू का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए वे सफल नहीं हुए। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपनी पार्टी (जनसुराज) के 238 उम्मीदवार खड़े किये थे। लेकिन एक भी जीत नहीं पाया। यानी वे केवल रेस में जीतने वाले घोड़े पर ही दांव लगाते हैं। वह भी यह थ्योरी उन पर लागू नहीं होती। अगर कोई डॉक्टर दूसरों का बेहतर इलाज करे और अपने इलाज में ही फेल हो जाए तो उसे कितना काबिल डॉक्टर माना जाएगा ?

एक फिल्म के लिए 125 करोड़ लेते हैं विजय, अपार लोकप्रियता


थलपति विजय तमिल सिनेमा के सुपर स्टार हैं। उनके प्रशंसकों की बहुत बड़ी तादाद है। आज से पांच साल विजय एक फिल्म के लिए 100 करोड़ रुपये चार्ज करते थे। 2023 में एक खबर आयी थी कि उन्होंने एक फिल्म के लिए 200 रुपये मिले हैं। फिलहाल वे एक फिल्म के लिए 125 करोड़ रुपये लेते हैं। विजय की फीस महानायक माने जाने वाले रजनीकांत से भी अधिक है। जाहिर निर्माता उनकी अपार लोकप्रियता को देख कर ही इतनी बड़ी रकम देते हैं। उनके प्रशंसकों की इतनी बड़ी संख्या है कि वे उनकी फिल्म को हिट बना देते हैं। प्रशांत किशोर, विजय की लोकप्रियता से वाकिफ थे। विजय जब 2024 में पार्टी की रैलियां आयोजित करते थे तब उसमें इतनी भीड़ उमड़ती थी उसे संभालना मुश्किल हो जाता था। ऐसा लगता था कि ये कोई चुनावी सभा नहीं बल्कि किसी फिल्म का प्रीमियर हो। पहले ये माना जा रहा था कि ये भीड़ एक फिल्म स्टार को देखने के लिए उमड़ रही है। इसका राजनीतिक महत्व नहीं है। लेकिन धीरे-धीरे प्रशंसकों की यह भीड़ एक समर्पित वोट बैंक में बदल गयी। आइ-पैक ने इन संभावनाओं को देख कर ही विजय का चुनावी प्रबंधन संभाला था।

विजय के चुनाव प्रबंधन को I-PAC ने संभाला


जोसेफ विजय ने 2 फरवरी 2024 को ‘तमिला वेत्री कझगम’ (टीवीके) के नाम से नयी पार्टी बनायी थी। पार्टी के गठन के बाद उन्होंने चुनावी रणनीति बनाने वाली संस्था आइ-पैक ( I-PAC) से इलेक्शन कैंपेन के लिए सहयोग लिया। आइ-पैक संस्था प्रशांत किशोर की है। लेकिन प्रशांत किशोर ने 2021 में पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद इस संस्था के सभी पदों को छोड़ दिया था। अक्टूबर 2024 में उन्होंने बिहार में जनसुराज पार्टी की स्थापना की थी। इसके बाद वे फुल टाइम पॉलिटिशियन बन गये। वे भले नेता बन गये लेकिन उनकी सबसे बड़ी योग्यता चुनावी रणनीति बनाना ही है। वे निजी तौर पर आज भी राजनीतिक दलों को सलाह देते हैं। तकनीकी रूप से प्रशांत किशोर आइ-पैक में नहीं हैं लेकिन यह संस्था उनकी की सलाह पर चलती है। आइ-पैक तमिलनाडु में विजय का चुनावी प्रबंधन संभाल रही थी और प्रशांत किशोर आउट ऑफ द फील्ड, इसे जरूरी सलाह दे रहे थे।

फरवरी 2025 में विजय की रैली में शामिल होने तमिलनाडु गये थे PK


2 फरवरी 2025 को विजय ने महाबलिपुरम में अपनी पार्टी (टीवीके) का पहला स्थापना दिवस समारोह मनाया था। इस समारोह में प्रशांत किशोर भी शामिल हुए थे। हालांकि उस समय वे बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारी में व्यस्त थे। फिर भी वे विजय के लिए तमिलनाडु गये। उन्होंने ही विजय को बिना किसी गठबंधन के अकेले चुनाव लड़ने का सुझाव दिया था। वे विजय को जुलाई 2025 तक सलाह और सुझाव देते रहे। इसके बाद वे बिहार विधानसभा चुनाव में व्यस्त हो गये। लेकिन प्रशांत किशोर जीत के अपने खास नुस्खे बिहार चुनाव में खुद अपने लिए लागू नहीं कर सके। वे 238 सीटों पर लड़े और सिर्फ मढ़ौरा सीट पर दूसरा स्थान हासिल कर सके। 126 सीटों पर तीसरे स्थान पर रहे। उनकी पार्टी जनसुराज को केवल 3.44 फीसदी वोट ही मिले थे। इतने बड़े चुनावी रणनीतिकार का अपने चुनाव में इतना शर्मनाक प्रदर्शन, किसी सदमे से कम नहीं।

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