कौन हैं जॉन ब्रिटास? जिन्होंने बीजेपी सांसद सुष्मिता देव पर लगाया बार-बार 'लुंगीवाला' कहने का आरोप, मच गया बवाल

Updated on 12-08-2026 03:39 PM
तिरुवनंतपुरम/नई दिल्ली: संसद के मॉनसूत्र सत्र में बुधवार को ‘लुंगीवाला’ शब्द को लेकर राज्यसभा में सियासी टकराव हुआ। सीपीआई (एम) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने सदन में विशेषाधिकार नोटिस रखते हुए कह कि बीजेपी की सांसद सुष्मिता देव ने बार-बार उन्हें लुंगीवाला कहा। ब्रिटास ने बताया कि सोमवार को टैक्स से जुड़े कामकाज पर चर्चा के दौरान देव ने उनके भाषण में बार-बार बाधा डाली और उन्हें ‘लुंगीवाला’ कहकर संबोधित किया। इस मुद्दे पर हंगामा और सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। ब्रिटास ने इस मामले में दक्षिण भारत के लोगों से अपमान से जोड़ा है।
 

दक्षिण में लाखों लोग पहनते हैं लुंगी

ब्रिटास ने कहा कि लुंगी लाखों लोगों का पहनावा है। खासकर दक्षिण भारत के लोग इसे पहनते हैं। उनके इस शब्द का अपमानजनक इस्तेमाल दक्षिण भारतीयों का मजाक उड़ाने वाली पुरानी रूढ़ियों से जुड़ा रहा है। उन्होंने 1960 और 1970 के दशक में मुंबई में दक्षिण भारतीयों के खिलाफ चलाए गए अभियानों का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में ‘लुंगीवाला’ और ‘मद्रासी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल अपमानजनक तरीके से किया जाता था। ब्रिटास ने अपने नोटिस में दावा किया कि घटना के दौरान मौजूद कुछ सांसदों ने भी टिप्पणी पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने बताया कि पास बैठे सुखेंदु शेखर रॉय ने बाद में सुष्मिता देव को माफी मांगने की सलाह देने की बात कही थी। ब्रिटास ने यह मामला केवल एक सांसद की गरिमा का नहीं, बल्कि अलग-अलग राज्यों और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से आने वाले सदस्यों के सम्मान से भी जुड़ा है।

कौन हैं जॉन ब्रिटास

डॉ. जॉन ब्रिटास एक अनुभवी पत्रकार और केरल में लेफ्ट के नेता हैं। वह कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) के राज्यसभा सदस्य और पार्लियामेंट्री पार्टी के नेता हैं। वह वह कैराली टेलीविजन नेटवर्क (मलयालम कम्युनिकेशंस लिमिटेड) के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एडिटर के तौर पर भी काम करते हैं। वह अप्रैल 2021 में राज्यसभा के लिए चुने गए थे। मई 2025 में उन्हें ऊपरी सदन में CPI(M) की पार्लियामेंट्री पार्टी के नेता के पद पर प्रमोट किया गया। वह राज्यसभा आने से पहले 2016 से 2021 तक केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के मीडिया सलाहकार रहे हैं। वह बतौर पत्रकार बाबरी मस्जिद गिराए जाने और गुजरात दंगों रिपोर्टिंग कर चुके हैं।

जेएनयू से पढ़े हैं ब्रिटास

15 मई 1966 को केरल के कन्नूर में जन्मे ब्रिटास एक एक्टिव स्टूडेंट पॉलिटिकल लीडर थे। उनके पास नई दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) समेत कई इंस्टीट्यूशन से डिग्री हैं। 15 मई 1966 को जन्में पिछले दिनों तब चर्चा में आए थे जब उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रोटेस्ट में एक AISA की प्रमुख कार्यकर्ता को कानूनी कार्रवाई में मदद की थी। जॉन ब्रिटास की घोषित नेट वर्थ लगभग 3.99 करोड़ है।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 24 October 2026
नई दिल्ली: रक्षा सचिव राजेश सिंह ने एक अहम जानकारी देते हुए बताया है कि यूरोप अब भारत में बने सैन्य उपकरणों के लिए एक फल-फूल रहा बाजार बन गया…
 24 October 2026
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश भर के सरकारी और निजी स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश दिया है कि वे एक बार इस्तेमाल होने वाले मेडिकल उपकरणों और सर्जिकल सामानों का…
 24 October 2026
नई दिल्ली: भारत 26 और 27 अक्टूबर को नई दिल्ली में 12 वें ब्रिक्स संसदीय फोरम की मेजबानी करेगा। इस बैठक में रूस, ईरान, चीन, ब्राजील और संयुक्त अरब अमीरात…
 24 October 2026
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि एमएलसी चुनाव की वोटर लिस्ट में अजीब-गरीब नामों…
 24 October 2026
नई दिल्ली: आजाद समाज पार्टी के प्रमुख और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर दायर याचिका पर दिल्ली की अदालत में सुनवाई…
 24 October 2026
नई दिल्ली: शुक्रवार को जारी भारतीय सेना के नए सिद्धां में भविष्य के संघर्षों की तैयारी के लिए एक रूपरेखा दी गई है। इसमें अधिकारियों को निर्णय लेने की प्रक्रिया…
 23 October 2026
अमित आनंद चौधरी, नई दिल्ली: सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने यह स्वीकार किया है कि अस्पताल मरीजों से दवाओं और अन्य जरूरी सामानों के लिए बहुत अधिक MRP वसूलते…
 23 October 2026
अमित आनंद चौधरी, नई दिल्ली: एनआरआई जोड़ों के बीच बच्चों की कस्टडी को लेकर होने वाले विवाद अक्सर अंतरराष्ट्रीय कानूनी लड़ाई का रूप ले लेते हैं। ऐसी स्थिति में, जब…
 23 October 2026
नई दिल्ली: सूचना का अधिकार के तहत हुए हालिया खुलासे के अनुसार, कैबिनेट सचिवालय ने चुनाव आयुक्तों की शिकायत पर निर्वाचन आयो के आंतरिक कामकाज में दखल देने से इनकार…
Advt.