CBI ऊपर वालों को बचा लेती है, पेपर लीक होता नहीं कराया जाता है', खान सर का सनसनीखेज खुलासा!

Updated on 19-05-2026 12:08 PM
पटना: नीट-यूजी पेपर लीक मामला सामने आने के बाद से पटना के चर्चित शिक्षक खान सर लगातार सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं। इतना ही नहीं, कई मीडिया संस्थान उनका इंटरव्यू लगातार प्रसारित कर रहे हैं। इसी दौरान एक निजी चैनल को दिए साक्षात्कार में खान सर ने कई बड़े चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। खान सर ने बता दिया है कि इस पेपर लीक का खेल कैसे होता है। कौन इसके पीछे होता है। आरोपियों के साथ क्या होता है। सीबीआई क्या करती है। खान सर ने कहा कि सीबीआई के बस का नहीं है, पकड़कर रखना, हम आपको गारंटी देते हैं। कहिए, हम आपको लिखकर दे देते हैं। सीबीआई के बस का नहीं है। सीबीआई जिनको पकड़ी है न। बस उसको स्टूडेंट्स को दे दीजिए। देखिए, टॉप तक नहीं निकलवा दिए, तो कहिएगा। पीटना चालू कीजिए, वो अपने ऊपरवाले के बारे में बताएगा। इसको तुम देखो। उसको थूरना चालू कीजिए।


खान सर का खुलासा

खान सर ने एजेंसी पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि सीबीआई ऊपर वाले को ही बचा लेगी। जो पकड़ा जाए, उसे स्टूडेंट्स के हवाले कीजिए। देखिएगा, टॉप तक नहीं पहुंच जाए, तो जो कहिए सो। सबकी निगरानी में। ऐसा नहीं है कि हम लोग उसकी जान ले लेंगे। उन लोगों को बचाया जाता है। आप यकीन मानिए, पेपर लीक होता नहीं है। लीक कराया जाता है। जब पेपर लीक कराया जाता है, तब ही डिसाइड हो जाता है कि बलि का बकरा किसे बनाया जाएगा। कोई नॉर्मल बच्चे को पकड़ा जाएगा, उसको कुछ पता ही नहीं है। जिसको सीबीआई उठा कर ले गई है। वो बेचारा मोहरा है। उसको पहले से ही। उसको पता ही नहीं है कि मैटर क्या है नीट का? उसको पैसे दिए गए होंगे। उसे कहा गया होगा कि तुम इस चीज को एक्सेप्ट कर लेना। उसको मार पीट दीजिएगा, तो नहीं बताएगा।

सीबीआई जांच पर सवाल?

खान सर ने आगे कहा कि ये पहले से होता है। सीबीआई को क्या पता। आज हमारे पास गार्जियन आते हैं न। हम लोग बात नहीं कर पाते हैं। इस टाइम पर जो बच्चे आते हैं। हम लोग बात नहीं कर पाते हैं। वो लोग रो रहे हैं। आंख नहीं मिला पाते। अजीब सा लगता है। क्लास में जाने से पहले हिचकिचाहट होती है। बच्चे पूछेंगे, हम क्या जवाब देंगे। हम कोई नेता नहीं हैं, जो झूठे वादे करके चले आएंगे। हम लोग शिक्षक हैं, जो बोलेंगे, वो करना पड़ेगा। कोई जवाब नहीं है, हमारे पास। आरोपी को बचाया जाता है। बचाने के लिए सीबीआई लगाया जाता है। अंग्रेजों का आखिरी चाल क्या था। दिल्ली पुलिस एस्टेब्लिशमेंट एक्ट लाया गया, 1946 में। जो लोग आजादी की लड़ाई में मदद कर रहे हैं, उनको लाकर बर्बाद कर देना। उसी का नाम बदलकर सीबीआई रखा गया है।

जांच एजेंसी की आलोचना

खान सर ने सीबीआई की आलोचना करते हुए कहा कि ये अंग्रेजों का बनाया हुआ एजेंसी है। कहां से आप लोगों का काम करने लगेगा। नीट- यूजी पेपर लीक में चुपचाप लीपा पोती कर देगा। किसी को छह महीना। दो साल की सजा दिला देगा। छह महीना में वो जमानत ले लेगा। मीडिया दिखाएगी, देखिए उसको मुंह ढंक कर लाया गया है। किसको अंदर रखा, क्या किया, कोई मतलब नहीं। छह महीना में आरोपी बाहर आएगा। मीडिया को खबर भी नहीं लगेगी। कोई जमानत पर बाहर आया है। कठोर सजा नहीं होने की वजह से ये ऐसा होता है। हजार दो हजार करोड़ का बिजनेस है। पांच सौ करोड़ से नीचे कमाना नहीं है। दो साल की जगह, तीन साल की सजा दे दो यदि पांच सौ करोड़ रुपये का धंधा है। पांच करोड़ में लोग पांच साल जेल जाने को तैयार है। बेरोजगारी इतना भयानक है। ये तो पांच सौ करोड़ का मामला है।

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