सम्राट को 'अंगूठा छाप' सीएम बताने वाले तेजस्वी ने जारी की 20 सवालों की लिस्ट, 21 साल का मांगा हिसाब

Updated on 29-06-2026 01:32 PM
पटना: बिहार में अपराध और भ्रष्टाचार बढ़ने के आरोपों को लेकर सम्राट सरकार पर तेजस्वी ने तीखा हमला बोला। राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने सम्राट चौधरी को 'रबर-स्टांप' मुख्यमंत्री बताया और कहा कि उनमें काबिलियत की कमी है। पटना में रविवार को पत्रकारों से बात करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने राज्य की वित्तीय स्थिति पर सवाल उठाए और कहा कि सरकारी खजाना खाली होने के कारण वेतन और पेंशन में देरी हुई है।

तेजस्वी यादव ने कहा, 'राज्य एक नाजुक वित्तीय स्थिति से गुजर रहा है। फंड की कमी के कारण वेतन भुगतान में देरी हुई है और सरकारी योजनाओं और विकास परियोजनाओं पर बुरा असर पड़ा है। राज्य में भ्रष्टाचार और अपराध का बोलबाला है। कुछ चुनिंदा नौकरशाह सरकार चला रहे हैं। सम्राट चौधरी एक 'रबर-स्टांप' मुख्यमंत्री हैं। सम्राट चौधरी 'अंगूठा छाप' हैं और उनमें काबिलियत की कमी है। वो अपने शीर्ष नेतृत्व के निर्देशों पर काम कर रहे हैं।' 'रबर-स्टांप' मुख्यमंत्री का मतलब नाममात्र के मुख्यमंत्री से है, जो खुद निर्णय नहीं लेता हो। इसके साथ ही सोमवार को 20 सवालों से 21 साल का हिसाब मांग लिया।



रिशुश्री मामले पर तेजस्वी ने सरकार से पूछे 20 सवाल

  1. एक मामूली-सा ठेकेदार (रिशुश्री) कई विभागों के टेंडरों को अपनी मर्जी से कैसे मैनेज कर रहा था? सरकार का निगरानी तंत्र इतने वर्षों तक क्या कर रहा थी? या अधिकारियों द्वारा निजी लाभ के लिए सब कुछ नजरअंदाज किया जा रहा था?
  2. ED की जांच में सामने आए चैट्स से पता चलता है कि रिशु श्री कई वरिष्ठ IAS अधिकारियों के प्रभावशाली कॉकस को सत्ता और सर्वोच्च अधिकारियों का संरक्षण कैसे प्राप्त था? वह अधिकारियों को निर्देश किसकी शह पर देता था?
  3. चार्जशीट में बड़ी मछलियों को छोड़ दिया गया है? क्या ऐसा करने में देरी के पीछे क्या कोई राजनैतिक दबाव है अथवा सत्ता में बैठे राजनेताओं को खुद पकड़े जाने का डर है?
  4. दो IAS अधिकारियों को निलंबित किया गया लेकिन चार्जशीट में उनका नाम नहीं है? उनकी तत्काल गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई? क्या सरकार को उनसे सबके पत्ते खोल देने की धमकी मिली है? भाजपा और जदयू ने सत्ता संरक्षित और पोषित भ्रष्टाचारियों को सजा से इम्यूनिटी क्यों दिया हुआ है?
  5. वित्त विभाग के तत्कालीन संयुक्त सचिव, जल संसाधन विभाग, भवन निर्माण विभाग के इंजीनियरों की गिरफ्तारी के बाद, क्या सरकार ने इस बात की समीक्षा की है कि इन्होंने अब तक कुल कितने करोड़ के सरकारी फंड को डायवर्ट किया? और अगर हां तो इस राशि को सार्वजनिक करने में देरी क्यों की जा रही है? क्या सरकार में बैठे लोगों को इसमें से 'कट' मिलना बाकी है?
  6. आरोपी रिशु श्री पहले से तय करता था कि ठेका किसे मिलेगा और उसी हिसाब से विभागीय टेंडर की शर्तें (क्राइटेरिया) बदलवा देता था। क्या इस सिंडिकेट के सरगना मुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री कार्यालय और निवास में बैठे अधिकारी थे और है?
  7. जांच में सामने आया है कि सरकारी विभागों में बिल पास कराने और टेंडर देने के बदले 2% से 3.5% तक का फिक्स्ड कमीशन चलता था। क्या यह भ्रष्टाचार में नग्न सरकार के 'जीरो टॉलरेंस' के दावों की धज्जियां नहीं उड़ाता?
  8. क्या सरकार रिशुश्री और उनसे संबंधित कंपनियों को मिले सभी टेंडरों की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराएगी? या सरकार को चिंता है कि उनके अपने प्रिय पोषित अधिकारी फंस ना जाएं?
  9. क्या ये संयोग है कि सारी Beneficiary कंपनियां गुजरात से है इसलिए उसे बचाया जा रहा है?
  10. रिशुश्री द्वारा अधिकारियों और उनके परिवारों की विदेशी यात्राओं, एयर टिकट और महंगे गिफ्ट्स का खर्च उठाने की बात सामने आई है। गृह विभाग, EOU, निगरानी और खुफिया विभाग (Intelligence Bureau) इस वित्तीय लेन-देन से बेखबर क्यों थे? या सरकार से उन्हें बेखबर रहने का ढोंग करने के लिए कहा गया था?
  11. छापेमारी में रिशु श्री के पास से 99 संपत्तियों के डीड और करोड़ों की नकदी/जेवरात मिले हैं। बिहार की जनता जानना चाहती है कि एक ठेकेदार के पास राज्य के बजट का एक बड़ा हिस्सा कैसे चला गया?
  12. सरकार केवल 'छोटी मछलियों' और कुछ चुनिंदा अधिकारियों को बलि का बकरा बना रही है। इस सिंडिकेट के शीर्ष पर बैठे असली राजनैतिक आकाओं और 'अमृतपान' करने वाले अधिकारियों के नाम कब सामने लाए जाएंगे?
  13. जिन विभागों में यह महाघोटाला हुआ, उनके विभागीय मंत्रियों ने अभी तक अपनी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा क्यों नहीं दिया है?
  14. सरकार को सभी जानकारी उपलब्ध हो जाने के बाद भी एक साल से अधिक का समय लगा। ED के कहने के बावजूद भी बिहार पुलिस ने महीनों तक FIR क्यों दर्ज नहीं की थी? क्या यह देरी सबूतों को मिटाने, 'अपनों' को बचाने और फाइलें दबाने के लिए की गई थी?
  15. कुछ अधिकारी इस घोटाले को दबाने के लिए दूसरे माध्यमों का सहारा ले रहे हैं? बिहार सरकार के वकील रिशुश्री के खिलाफ कोर्ट में क्यों उपस्थित नहीं हुए?
  16. कोसी बेसिन विकास परियोजना और गुजरात की कंपनी को कोसी बराज का ठेका दिलाने में टेंडर माफिया रिशुश्री ने मदद की। बिहार के बाढ़ नियंत्रण और सुरक्षा से जुड़े इतने संवेदनशील प्रोजेक्ट में इतनी आसानी से भ्रष्टाचार कैसे हो जा रहा है?
  17. क्या सरकार का पूरा आंतरिक ऑडिट सिस्टम और विजिलेंस विभाग पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है जो इस स्केल क महाघोटाले को ससमय उजागर नहीं कर सकता या सभी इस भ्रष्टाचार में कहीं ना कहीं से लिप्त हैं?
  18. जब राज्य में सब कुछ ई-टेंडरिंग (e-Tendering) के जरिए होता है, तो BJP-JDU सरकार के पाले-पोसे टेंडर माफिया का सिंडिकेट डिजिटल पोर्टल को कैसे मैनिपुलेट और मैनेज कर रहा था?
  19. एसवीयू ने 4000 पन्नों की चार्जशीट में सिर्फ 7 मुख्य आरोपियों को नामजद किया है और कहा है कि अन्य के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं। यह बाकी बचे रसूखदार अधिकारियों और नेताओं को 'क्लीन चिट' देने की जल्दबाजी नहीं है तो क्या है?

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