पाकिस्तान ने दी भारत को युद्ध की धमकी, दिल्ली के इस एक फैसले से पड़ोसी देश का कमाऊ पूत डूबने की कगार पर
Updated on
22-06-2026 01:32 PM
नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच जल सुरक्षा को लेकर तनाव चरम पर पहुंच गया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भारत को सीधी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर पाकिस्तान की जल सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ, तो उनका देश भारत के खिलाफ युद्ध की राह पर जा सकता है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पहले से ही गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। भारत की ओर से जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद 1960 के 'सिंधु जल समझौते' को निलंबित किए हुए एक वर्ष से अधिक का समय हो चुका है। ऐसे में पाकिस्तान में पानी की किल्लत हो गई है जिससे वहां की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है। ईरान युद्ध के कारण ईंधन संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए पानी की कमी से और परेशानियां पैदा हो गई हैं। पाकितान का कमाऊ पूत कहे जाने वाले टेक्सटाइल सेक्टर पर भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
क्यों बौखलाया पाकिस्तान?
पाकिस्तानी समाचार चैनल ARY न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि अगर इस बात के पुख्ता सबूत मिले कि भारत पानी के बहाव को रोकने या मोड़ने के लिए चिंताजनक गति से आगे बढ़ रहा है, तो पाकिस्तान सैन्य कदम उठाने पर विचार करेगा। दरअसल, पाकिस्तानी नेतृत्व की यह बौखलाहट भारत के जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने संकेत दिया था कि जून 2028 तक पाकिस्तान की ओर जाने वाले सिंधु तंत्र के पानी को पूरी तरह से रोका जा सकता है।
पहलगाम हमले के बाद भारत का कड़ा रुख
दोनों परमाणु-संपन्न देशों के बीच इस ऐतिहासिक समझौते को लेकर दरार तब आई, जब अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक बड़ा पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकी हमला हुआ, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई।
इसके जवाब में भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए 1960 से चले आ रहे सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दिया। नई दिल्ली ने साफ कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह से बंद नहीं करता, तब तक यह निलंबन जारी रहेगा।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर बड़ी मार
जल संकट के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर बड़ी मार पड़ी है। इस संधि के तहत पाकिस्तान को बेसिन का 80% पानी मिलता है, जिससे उसकी 80% खेती चलती है। पाकिस्तान की 22 करोड़ से अधिक की आबादी पूरी तरह से कृषि पर निर्भर है, जो देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
पाकिस्तान के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में कृषि का हिस्सा लगभग 23% है।
देश के कुल कार्यबल का 40% से अधिक हिस्सा सीधे तौर पर खेती और पशुपालन से जुड़ा है। इसमें विशेष रूप से महिलाओं की भागीदारी बहुत ज्यादा है। कृषि क्षेत्र में काम करने वाले लोगों में दो-तिहाई महिलाएं हैं।
पाकिस्तान की 61% से अधिक ग्रामीण आबादी अपनी आजीविका के लिए सीधे तौर पर फसलों और पशुधन पर निर्भर करती है।
कपास की खेती पर संकट
पाकिस्तान के लिए सिंधु नदी प्रणाली का पानी उसकी खाद्य सुरक्षा, कपड़ा उद्योग और करोड़ों लोगों के रोजगार की गारंटी है। पाकिस्तान का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर टेक्सटाइल है, जो पूरी तरह से कपास की खेती पर टिका है। सिंधु नदी का पानी मुख्य रूप से निम्नलिखित फसलों को सींचता है:
गेहूं, धान, गन्ना, मक्का और कपास।
पाकिस्तान में सालाना लगभग 27.4 मिलियन टन गेहूं, 8.5 मिलियन टन चावल और 7.04 मिलियन गांठ कपास का उत्पादन होता है।
टेक्सटाइल इंडस्ट्री को बड़ा खतरा
देश के कुल कृषि क्षेत्र का 44% हिस्सा नहरों और ट्यूबवेलों के माध्यम से सींचा जाता है, जिसमें पंजाब और सिंध प्रांत सबसे आगे हैं। यह पूरा नहरी तंत्र सिंधु नदी प्रणाली से ही निकलता है।
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