
( 90 डिग्री का पुल, 180 डिग्री का यू-टर्न’ – PWD ने सस्पेंड अफसरों को बहाल कर दिया )
( संजय रायजादा )
भोपाल। मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग ने साबित कर दिया कि यहां न्यूटन के नियम भले न चलें, पर ‘निलंबन के नियम’ जरूर लचीले हैं। ऐशबाग रेलवे ओवर ब्रिज पर 90 डिग्री का मोड़ बनाकर पूरे देश में ‘इंजीनियरिंग का अजूबा’ रचने वाले अफसर अब फिर कुर्सी पर हैं।
*‘सस्पेंशन: एक छोटा सा ब्रेक’*
न्यूज़ चैनल्स और सोशल मीडिया पर दुनिया भर में चर्चित होने के बावजूद कई दिन तक तो विभाग मौन साधे रहा । फिर मुख्यमंत्री मोहन यादव की नाराज़गी के बाद 28.06.2025 को विभाग ने एक आदेश निकाला “90 डिग्री का मोड़ क्यों बनाया?” यह पूछकर प्रभारी मुख्य अभियंता जी.पी. वर्मा, प्रभारी SDO रवि कुमार शुक्ला और उपयंत्री उमाशंकर मिश्रा , पूर्व चीफ़ इंजीनियर सेतू संजय खान्डे , एक्जीक्यूटिव इंजीनियर जावेद शकील , डिजाइनर शबाना रज्जाक , एसडीओ शानुल सक्सेना और रोली शुक्ला को सस्पेंड कर दिया। जनता ताली बजाने ही वाली थी कि 08.05.2026 को लेकर नया आदेश आ गया “चलो, बहुत आराम कर लिया। अब वापस आओ, अगला पुल बनाना है।” हालांकि सरकारी बुलावे के आमंत्रण पत्र यानि आदेश में सिर्फ जी पी वर्मा, एसडीओ रवि शुक्ला और उमाशंकर मिश्रा का नाम ही छपा है। बाकी निलंबितों के नामों का उल्लेख नहीं है।
*‘बहाली की शर्त: अगला आदेश तक’*
आदेश में लिखा है “आगामी आदेश तक कार्यव्यवस्थ प्रमुख अभियंता के पद पर पदस्थ किया जाता है।” मतलब साफ है – PWD में सस्पेंशन ‘परमानेंट डिलीट’ नहीं, ‘टेंपरेरी हाइड’ बटन है। जब तक जांच चल रही है, तब तक अफसर ‘प्रमुख अभियंता’ बनकर नई फाइलों पर साइन करेंगे। वाह रे सिस्टम!
*‘90 डिग्री वाले को 360 डिग्री माफ’*
आरोप है कि ऐशबाग ROB का डिजाइन ऐसा बनाया कि गाड़ी सीधी चली तो खंभा, मुड़ी तो खाई। जनता पूछ रही थी “ये पुल है या मौत का कुआं?” विभाग ने जांच बैठाई, अफसरों को हटाया। फिर अचानक याद आया “अरे, अनुभवी लोग हैं। 90 डिग्री का बना लिया तो 80 डिग्री का भी बना लेंगे।”
सूत्र बताते हैं कि बहाली का फॉर्मूला पुराना है “जेब खाली करो, कुर्सी खाली नहीं रहेगी।”जी.पी. वर्मा पहले भी ‘जेब खाली करके’ बहाल हो चुके हैं, ऐसा शिकायतों में दावा है। इस बार तो ‘हैट्रिक’ लग गई।
*‘जांच जारी है, कुर्सी भी जारी है’*
आदेश कहता है “निलंबन अवधि का निराकरण विभागीय जांच के बाद होगा।” यानी पहले बहाल करो, फिर जांच करो। ये वैसा ही है जैसे परीक्षा से पहले पास सर्टिफिकेट दे देना। PWD की नीति स्पष्ट है “दोषी सिद्ध होने तक निर्दोष, और निर्दोष होते ही प्रमोशन।”
*‘अगला प्रोजेक्ट: 100 डिग्री?’*
अब तीनों अफसर फिर से ‘सेतु परिक्षेत्र’ संभालेंगे। इंदौर की जनता डरी हुई है “कहीं जिला कोर्ट का भवन भी 90 डिग्री पर न बना दें।” PWD का जवाब रेडीमेड है “डिजाइन में थोड़ा ट्विस्ट है, इसे ‘आर्ट’ समझिए।”
दरअसल PWD में सस्पेंशन सजा नहीं, ‘रिचार्ज कूपन’ है। 11 महीने नेटवर्क से बाहर रहो, फिर ‘अनलिमिटेड प्लान’ के साथ वापसी। और जनता? वो तो टोल टैक्स देकर 90 डिग्री के मोड़ पर ब्रेक मारती रहेगी।