संकट में भी तेल नहीं निकाल पाया भारत, कोर सेक्टर ग्रोथ 7 महीने के निचले स्तर पर, इकोनॉमी को बड़ा झटका
Updated on
23-06-2026 01:33 PM
नई दिल्ली: भारत के कोर सेक्टर की विकास दर मई महीने में घटकर सात महीने के निचले स्तर 0.5% (सालाना आधार पर) पर आ गई है। अप्रैल में यह 1.8% थी। सोमवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार एनर्जी से जुड़ी इंडस्ट्रीज के कमजोर प्रदर्शन के कारण कुल उत्पादन में यह गिरावट दर्ज की गई है। ईरान संकट के बाद भी भारत का कच्चा तेल उत्पादन गिर गया।
पिछले साल यानी मई 2025 में इन आठ कोर सेक्टर की वृद्धि दर 1.2% रही थी। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि पिछले साल के कमजोर आधार के बावजूद विकास दर का कम रहना मुख्य रूप से पेट्रोलियम आधारित क्षेत्र के उत्पादन में आई गिरावट के कारण है। हालांकि बिजली सेक्टर में जबरदस्त तेजी देखी गई।
5 क्षेत्रों में दर्ज की गई गिरावट
मई के महीने में आठ में से 5 कोर सेक्टर के उत्पादन में गिरावट देखी गई: रिफाइनरी उत्पाद: इसमें सबसे बड़ी 8.7% की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले 42 महीनों का सबसे निचला स्तर है। कोयला: उत्पादन में 9.3% की कमी आई। अप्रैल में यह 8.8% गिरा था। प्राकृतिक गैस: उत्पादन 4.9% घटा। कच्चा तेल: उत्पादन में 4.6% की गिरावट आई। उर्वरक: उत्पादन 0.9% कम रहा।
पश्चिम एशिया संकट जिम्मेदार
इक्रा (ICRA) के प्रिंसिपल इकोनॉमिस्ट राहुल अग्रवाल ने बताया कि रिफाइनरी उत्पादन में आई इस कमी के पीछे कुछ हद तक पश्चिम एशिया का संकट जिम्मेदार है। वहीं, सबनवीस के मुताबिक, कच्चे तेल के बढ़ते आयात और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नरम कीमतों के कारण पेट्रोलियम क्षेत्र प्रभावित हुआ है। कोयला उत्पादन में कमी इसलिए आई क्योंकि कंपनियां अपने स्टॉक को बेहतर तरीके से मैनेज करने और उत्पादन घटाने पर ध्यान दे रही थीं।
सीमेंट, स्टील और बिजली क्षेत्र में मजबूती
दूसरी ओर इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कुछ क्षेत्रों ने इस गिरावट को संभालने का काम किया: सीमेंट: इसका उत्पादन मई में तीन महीने के उच्च स्तर 8.4% पर पहुंच गया। अप्रैल में यह 8.2% था। स्टील: इसमें 5% की बढ़त देखी गई। बिजली: भीषण गर्मी के कारण घरेलू मांग बढ़ने से बिजली उत्पादन 8.7% की रफ्तार से बढ़ा, जो पिछले 19 महीनों में सबसे तेज है।
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