IAS तुकाराम मुंढे का चिप्स-कोल्डड्रिंक्स बनाने वाली कंपनियों से सवाल, भारत में अलग न्यूट्रिशन स्टैंडर्ड क्यों

Updated on 29-08-2026 12:09 PM
मुंबई: महाराष्ट्र FDA के कमिश्नर तुकाराम मुंढे इन दिनों सुर्खियों पर है। मुंढे ने कई बड़ी-बड़ी फूड कंपनियों के खिलाफ एक्शन लेकर दिखा दिया है कि वो नियमों को तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई करते रहेंगे। वहीं अब मुंढे ने भारत और दूसरे देशों में खाने वाले एक ही प्रोडक्ट के लिए अलग-अलग न्यूट्रिशन स्टैंडर्ड अपनाने वाली ग्लोबल फूड और बेवरेज कंपनियों की नैतिक जिम्मेदारी पर सवाल उठाए हैं। मुंढे ने चिप्स और कोल्डड्रिंक्स बनाने वाली कंपनियों से सवाल करते हुए पूछा है कि भारत में अलग न्यूट्रिशन स्टैंडर्ड क्यों?


खाने-पीने वाले प्रोडक्ट मे अलग-अलग न्यूट्रिशन स्टैंडर्ड

उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं के प्रति कंपनियों की जिम्मेदारी सिर्फ स्थानीय कानूनों का पालन करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। दरअसल न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में अलग-अलग देशों में बिकने वाले एक ही तरह के उत्पादों में पोषण संबंधी अंतर का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में कोल्ड ड्रिंक फैंटा का उदाहरण देते हुए बताया गया कि लंदन में बिकने वाले एक समान आकार के कैन में करीब 63 कैलोरी होती हैं। वहीं भारत में बिकने वाले इसी कैन में 185 कैलोरी और लगभग तीन गुना अधिक चीनी बताई गई है। इस अंतर पर प्रतिक्रिया देते हुए तुकाराम मुंढे ने कंपनियों की नैतिक जिम्मेदारी पर सवाल खड़ा किया।

मुंढे ने पूछा- अलग-अलग स्टैंडर्ड क्यों

तुकाराम मुंढे ने पूछा कि इसमें नैतिकता कहां है? कंपनियों को न सिर्फ कानूनी नियमों का पालन करना चाहिए, बल्कि नैतिक व्यवहार भी अपनाना चाहिए। अलग स्टैंडर्ड क्यों? उन्होंने जोर देकर कहा कि बड़ी कंपनियों की समाज के प्रति भी जिम्मेदारी है और उन्हें सिर्फ इस आधार पर अपने उत्पादों को सही नहीं मान लेना चाहिए कि वे संबंधित देश के मौजूदा कानूनों के दायरे में आते हैं। बता दें कि मुंढे का यह बयान भारत में पैकेज्ड फूड और बेवरेज की पोषण गुणवत्ता को लेकर चल रही बहस के बीच आया है।


क्यों चर्चा में हैं मुंढे

तुकाराम मुंडे पिछले कुछ समय से महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा और साफ-सफाई से जुड़े मामलों में सख्त कार्रवाई को लेकर चर्चा में रहे हैं। राज्य की फूड सेफ्टी टीमों ने हाल के हफ्तों में स्वच्छता नियमों के उल्लंघन को लेकर कई प्रतिष्ठानों की जांच और छापेमारी की है। इनमें बड़ी रेस्टोरेंट चेन भी शामिल रही हैं। फूड कंपनियों पर एक्शन लेने के साथ ही एफडीए ने दवा निर्माता कंपनी सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड पर भी एक्शन लिया है। कंपनी की पुणे स्थित कैरी एंड फॉरवर्डिंग (C&F) यूनिट का दवा बिक्री लाइसेंस रद्द कर दिया गया।

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