विदेशी शराब के बाद अब बीयर बनाने वाली कंपनियों ने भी राज्यों से मांगी दाम बढ़ाने की इजाजत
Updated on
07-05-2026 11:49 AM
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव आपके लाइफस्टाइल को महंगा कर रहा है। पहले तो इससे दैनिक उपयोग की चीजों के दाम बढ़े। कल ही खबर आई थी कि इससे इंडिया मेड फॉरेन लिकर (IMFL) या भारत में विदेशी शराब बनाने वाली कंपनियां परेशान हैं। अब बीयर बनाने वालों ने भी यही बात कही है। उनका कहना है कि शीशे की बढ़ती कीमत और उसकी कमी ने परेशान कर दिया है। हालत ऐसी हो गई है कि उन्हें मांग के मुताबिक बढ़ी कीमत देने के बावजूद समय पर बोतलों की सप्लाई नहीं मिल रही है। इसलिए इन्होंने राज्य सरकारों से बीयर की प्राइस में थोड़ी सी बढ़ोतरी की इजाजत मांगी है।
बोतल की सप्लाई घटी
भारत में बीयर बनाने वाली कंपनियों का एक संगठन है ब्रूवर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (Brewers Association of India)। इसके महानिदेशक विनोद गिरि ने एनबीटी को बताया कि बीयर बनाने के बाद उसे ग्राहक तक पहुंचाना बड़ा काम है। इसे या तो शीशे की बोतल में पैक करते हैं या फिर एल्यूमिनियम के केन में। भारत में करीब 80 फीसदी बीयर शीशे की बोतल में बिकती है। युद्ध की वजह से देश में शीशा बनाना महंगा हो गया है साथ ही उसकी सप्लाई भी घट गई है।
20 फीसदी बढ़ गई कीमत
विनोद गिरि बताते हैं कि बीयर की कीमत में बोतल का कॉस्ट 40 से 45 फीसदी पड़ता है। फैक्ट्री में बीयर की खाली बोतल 12 से 15 रुपये में मिलती है जबकि एल्यूमिनियम का केन आठ से नौ रुपये में मिलता है। चूंकि बीयर की अधिकतर बिक्री (80%) बोतल में होती है इसलिए पैकिंग भी बोतल में ही करनी होती है। इस समय गैस की कमी से शीशे की बोतल बनाने वाली फैक्ट्रियों में कम उत्पादन हो पा रहा है। साथ ही उनकी लागत बढ़ गई है। इसलिए उन्होंने कीमत में करीब 20 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी है। यही हालत केन बनाने वालों की भी है। दरअसल, देश में दो कंपनी हैं जो केन बनाती हैं। दोनों मल्टीनेशनल कंपनियां हैं। इनका घरेलू प्रोडक्शन कम है, इसलिए विदेशों से केन मंगा कर ऑर्डर पूरा करते हैं। युद्ध की वजह से इस समय लॉजिस्टिक कॉस्ट बढ़ गया है, इसलिए उन्होंने भी कीमत बढ़ा ही है।
शराब बनाने वालों की भी यही मांग
देश में विदेशी शराब बनाने वाली कंपनियों के संगठन कंफेडरेशन ऑफ इंडियान अल्कोहलिक बीवरेज कंपनीज (CIABC) ने भी राज्य सरकारों से ऐसी ही मांग की है। उन्होंने राज्यों से कीमत में थोड़ी बढ़ोतरी की छूट मांगी है। सीआईएबीसी के महासचिव अनंत एस. अय्यर ने राज्य सरकारों को भेजे रिप्रजेंटेशन में कहा है कि पश्चिम एशिया से दुनिया भर का करीब 20 फीसदी क्रूड ऑयल सप्लाई होता है। लेकिन इस समय जो संकट चल रहा है, उससे इसकी सप्लाई बाधित हुई है। उसका असर अन्य इंडस्ट्री के साथ-साथ पैकेजिंग इंडस्ट्री पर भी पड़ा है। लॉजिस्टिक कॉस्ट बढ़ गया है। साथ ही शीशा बनाने के उद्योग भी संकट में हैं। कुल मिला कर पूरी अर्थव्यवस्था पर महंगाई का प्रभाव पड़ रहा है।
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