( बागड बिल्लों की दादागिरी अब छतरपुर पहुंची, राय की लिस्ट वालों को ही पेमेंट )
( संजय रायजादा )
भोपाल/छतरपुर। PWD के प्रमुख अभियंता यानी ईएनसी के.पी.एस. राणा के गृह ग्राम पेतपुरा, टीकमगढ़ के पड़ोसी ठेकेदार और बाल सखा प्रदीप राय को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दिए गए छतरपुर से रजपुरा- पाथापुर मार्ग का 5.27 करोड़ के ठेके का विरोध स्थानीय ठेकेदारों को भारी पड़ गया है। ईएनसी के निर्देश पर छतरपुर के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर आशीष भारती ने प्रदीप राय का विरोध कर रही छतरपुर कांट्रेक्टर एसोसिएशन से जुड़े इन ठेकेदारों द्वारा किए गए ए आर के कामों का भुगतान रोक दिया है।
छतरपुर के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर आशीष भारती ने बकाया बिल मांगने आए ठेकेदारों को साफ कह दिया है कि “पैसा विभाग से आ गया है, पर मिलेगा उसी को जिसका नाम गिर्राज कंस्ट्रक्शन / इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी के मालिक प्रदीप राय के जरिए उनके बाल सखा ENC के पी.एस. राणा ओके करेंगे ।”
*‘विरोध किया तो बिल गया’*
गौरतलब है कि छतरपुर कांट्रेक्टर एसोसिएशन ने ईएनसी राणा के साथ विभाग के प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह और मुख्यमंत्री मोहन यादव से शिकायत की थी कि मेसर्स गिर्राज कंस्ट्रक्शन/गिर्राज इन्फ्रास्ट्रक्चर के मालिक प्रदीप राय को पिछले 7 महीने में 25 करोड़ से ज्यादा के टेंडर ‘नियम ताक पर रखकर’ दिए गए हैं।
सबसे मसालेदार मामला टेंडर आईडी 2025 - PWDRB - 4516-1 का है – छतरपुर से रजपुरा-पाथापुर मार्ग, 5.27 करोड़ का काम। इसके लिए बुलाए गए टैंडर में शर्त थी कि ठेकेदार के पास खुद की जेसीबी, टैंडम रोलर और मोटर ग्रेडर होना चाहिए।
एसोसिएशन ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि गिर्राज कंपनी के पास न टैंडम रोलर था, न मोटर ग्रेडर। लेकिन कंपनी के मालिक और ईएनसी के पड़ोसी दोस्त प्रदीप राय ने इनको खरीदने का *रियान इन्फ्रासोल्यूशन का फर्जी बिल* लगा दिया। इसके बिल का इनवॉइस नंबर 112517 भी फर्जी निकला। रियान कंपनी ने खुद लिखकर दिया है कि उन्होंने गिर्राज कंपनी को कोई टैंडम रोलर बेचा ही नहीं है।
मोटर ग्रेडर का जुगाड़ और ज्यादा कड़क है। प्रदीप राय की कंपनी ने टैंडर में *RTO नंबर MP 16DA0382* डाला, जो RTO रिकॉर्ड में *मिनी ग्रेडर BS-III* का है। कंपनी के इनवॉइस में भी मॉडल *S-3218 मिनी ग्रेडर* लिखा है।
एसोसिएशन का आरोप है कि अन्य पात्र कंपनियों को ‘तकनीकी कमी’ बताकर बाहर कर दिया गया, पर फर्जी कागज वाली गिर्राज कंपनी को टेंडर मिल गया। एसोसिएशन ने इसके सबूत समेत ENC राणा , विभागीय प्रमुख सचिव और मुख्यमंत्री से शिकायत की , पर कार्रवाई तो दूर – राणा ने जांच उसी सागर CE सी.पी. सिंह को सौंप दी, *जिसने खुद टेंडर की सिफारिश की थी*। यानी ‘चोर की दाढ़ी में तिनका और जांच भी चोर ही करे’। मतलब " मुर्गी चोरी हुई तो लोमड़ी को चौकीदार बना दिया "।
*‘ENC का हुक्म, राय की मर्जी’*
एसोसिएशन में शामिल ठेकेदारों के मुताबिक उनके बिलों की राशि जारी होकर EE आशीष भारती के पास पहुंच चुकी है। पर भुगतान सिर्फ उन ठेकेदारों को हो रहा है जिनके नाम की पर्ची प्रदीप राय अपने ‘ईएनसी मित्र’ पी.एस. राणा को भेज रहे हैं। बाकी सबकी फाइलें ‘राणा-राय अघोषित गठबंधन’ में अटक गई हैं।
*‘एसोसिएशन में उबाल, सड़क पर आने की तैयारी’*
प्रदीप राय विरोधी छतरपुर कांट्रेक्टर एसोसिएशन का गुस्सा सातवें आसमान पर है। ठेकेदारों का कहना है कि “हमने ईमानदारी से सरकार का काम किया, तो पेमेंट के लिए राय की चौखट पर माथा क्यों टेकें?” एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर प्रदीप राय विरोधी ठेकेदारों को प्रताड़ित किया गया हुआ तो छतरपुर में काम ठप कर आंदोलन होगा।
*‘PWD का नया सिस्टम: पहले वफादारी, फिर भुगतान’*
तीन दिन पहले ही 90 डिग्री वाले पुल पर सस्पेंड होकर ‘जेब खाली करके’ बहाल होने वाले अफसरों का उदाहरण सब देख ही रहे हैं। अब नया ट्रेंड है “प्रदीप राय से दुश्मनी मतलब खजाना खाली”। PWD मुख्यालय से लेकर जिला दफ्तर तक पेमेंट की चाबी अब ‘राय दरबार’ में है। ENC पी.एस. राणा सिर्फ ‘हुक्म बजाने वाले’ बनकर रह गए हैं।
*सवाल सीधा है*:
जब विभाग पैसा जारी कर चुका है तो EE किस नियम से बिलों का भुगतान रोक रहे हैं? फिर ENC राणा सरकारी पद पर हैं या प्रदीप राय के PA? सवाल यह है कि क्या PWD में ठेकेदारों को काम के बदले राजनीतिक वफादारी का सर्टिफिकेट भी देना होगा?
फिलहाल छतरपुर में फाइलें दबी हैं, ठेकेदारों की जेब खाली है, और ‘राय-राणा-भारती’ तिकड़ी का सिस्टम फुल स्पीड में है। जांच की बात करना बेमानी है – क्योंकि यहां जांच कराने वाला ही कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है।