करोड़ों का बजट फिर भी ट्रेनों में गंदगी, बदबूदार टॉयलेट से यात्री परेशान, CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
Updated on
18-08-2026 06:13 PM
नई दिल्ली: भारी बजट के बावजूद रेलवे ट्रेनों की साफ-सफाई करने में फिसड्डी साबित हो रहा है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ( कैग ) की हाल में आई रिपोर्ट में इस बारे में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि ट्रेनों में सफाई व्यवस्था से 50 फीसदी यात्री असंतुष्ट नजर आए हैं। ऐसे में रेलवे की सफाई व्यवस्था, बायो-टॉयलेट के रखरखाव में दिए जा रहे फंड के सही इस्तेमाल न होने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि ट्रेनों में ऑनबोर्ड सफाई व्यवस्था 50 फीसदी यात्रियों को पसंद नहीं आई। ऐसे में उन यात्रियों को बड़ी परेशानी उठानी पड़ रही है जो लंबी दूरी की यात्रा करते हैं। ट्रेनों में साफ सफाई न होने हेल्थ संबंधी समस्या बढ़ने का खतरा रहता है। ऐसे में रेलवे की लापरवाही इन यात्रियों पर भारी पड़ रही है।
बजट की नहीं कोई कमी
रेलवे की ओर से साफ-सफाई में कमी ऐसी स्थिति में सामने आई है, जब बजट में कोई कमी नहीं है। कैग ने हाल में इस रिपोर्ट को संसद में पेश किया था। अपनी रिपोर्ट में कैग ने कहा कि बजट की कोई कमी नहीं है। इसके बावजूद रेलवे की ओर से ट्रेनों में साफ-सफाई को लेकर जमीनी स्तर पर काम और वित्तीय अनुशासन पूरी तरह खराब है।
बदबूदार टॉयलेट ने नाराज यात्री
कैग रिपोर्ट में बताया गया है कि धरातल पर स्थिति काफी खराब मिली।
कैग ने जो सर्वे कराया, उनमें 40 फीसदी से ज्यादा यात्री ट्रेनों में मौजूद टॉयलेट की बदबू और वहां भरे पानी पर नाराजगी जताई।
सर्वे के मुताबिक 50 फीसदी से ज्यादा यात्री ऑन-बोर्ड साफ-सफाई, सर्विस और सफाई कर्मचारियों की अनुपस्थिति से नाराज नजर आए।
झांसी और ग्वालियर जैसे मुख्य रेलवे स्टेशनों को बजट देने के बाद भी वहां कई प्रोजेक्ट अटके नजर आए।
जानकारी देने वाला कोई नहीं
कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वच्छता और रखरखाव के लिए रेलवे की ओर से सालाना करोड़ों रुपये का बजट आवंटित किया जाता है। इसके बाद भी ऑडिट टीम को पारदर्शिता से जानकारी देने वाला कोई नहीं है। कैग ने रिपोर्ट में बताया है कि रेलवे की ओर से ऐसा कोई भी शख्स नहीं है जो यह बता सके कि साफ-सफाई पर कितना बजट खर्च हुआ और कितना इस्तेमाल नहीं हो पाया।
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