बंगाली युवा बाबाओं को जेब में रखते हैं, झारखंड के मंत्री इरफान अंसारी ने योगी आदित्यनाथ का उड़ाया मजाक

Updated on 27-04-2026 01:39 PM
पटना: तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया है कि NDA सरकार ने बिहार की महिलाओं के साथविश्वासघात किया। राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने सोमवार को ये बड़ा आरोप लगाया और आंकड़े भी सामने रखे। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार की महिलाओं के साथ NDA सरकार ने विश्वासघात किया है, सफेद झूठ बोल उनकी भावनाओं का दोहन कर करोड़ों महिलाओं के साथ दिनदहाड़े धोखेबाजी की है।


चुनाव में हार के डर से फौरन भेजे 10 हजार रुपये- तेजस्वी यादव

तेजस्वी यादव के मुताबिक 'बिहार विधानसभा चुनाव में हार का अंदेशा होते ही, बीच चुनाव में मतदान के दिन तक, बैंक खुलवाकर मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए एनडीए सरकार ने महिलाओं और जीविका दीदियों के बैंक खातों में 10 हजार रूपये भेजे।'

10 हजार का लालच भी और धमकी भी- तेजस्वी

तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया है कि 'उन्हें लालच देकर, कड़ी चेतावनी और धमकी के साथ डरा कर कहा गया कि मतदान केंद्र में कैमरा लगा है अगर अमुक पार्टी के अमुक निशान पर बटन नहीं दबायेंगे तो आपके खाते में आए पैसे वसूलेंगे, प्रलोभन दिया गया कि चुनाव के बाद आगे की दो लाख की किश्त उम्मीद दी गई कि चुनाव के बाद छह महीने के अंदर शेष दूसरी किश्त को अविलंब महिलाओं के खाते में 2 लाख रूपये भेजें जाएंगे। छह महीने हो गए है अब ये धोखेबाज़-दगाबाज नेता अपनी कुर्सी के खेल में लीन है। खजाना खाली है। वित्तीय स्थिति बदतर है।'

तेजस्वी यादव का दावा कितना सही

तेजस्वी यादव ने दावा किया है कि 'चुनाव बाद पूर्व से इस योजना में पंजीकृत 18 लाख महिलाओं को न तो पहली किश्त के रुपये मिले और न ही 1 करोड़ 81 लाख जीविका दीदियों और महिलाओं को दूसरी किश्त मिली। जबकि चुनाव के समय वादा किया गया था कि इस योजना के तहत महिलाओं को 2 लाख रुपये दिए जाएंगे। अब बिहार का खजाना खाली है। केवल चुनावी लाभ लेने के लिए एनडीए ने बिहार की मातृशक्ति के साथ धोखेबाजी की है, उनके बाल-बच्चों के वर्तमान और भविष्य के साथ खिलवाड़ की है। युवाओं के सपनों का कत्ल किया है। शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि जैसे क्षेत्रों को जोखिम डाल दिया है। बिहार में अराजक स्थिति उत्पन्न हो चुकी है।'

NDA ने खाली कर दिया बिहार का खजाना- तेजस्वी

तेजस्वी यादव यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा कि 'सरकार जानती थी कि बिहार के पास सीमित संसाधन होने के बावजूद उधार लेकर चुनावों के अंतिम दिनों में वोट लूटने के लिए विभिन्न मदों में 41,000 करोड़ रुपए नगद बांटना आत्मघाती कदम है लेकिन कुर्सी के लालची लोगों ने राज्यहित पर स्वार्थ को प्राथमिकता दी। एजेंसियों में फंसे भ्रष्ट चंद अधिकारियों और बिहारी अस्मिता को दो बाहरियों के कदमों में गिरवी रखे रीढ़विहीन नेताओं को आम बिहारियों की नहीं बल्कि खुद के वर्तमान और अपने बच्चों के सुरक्षित भविष्य की चिंता थी जिसके कारण उन्होंने बिहार का सौदा किया।'

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