पीडब्ल्यूडी में अवैध रूप से तैनात सिद्दीकी की रवानगी ; कई सवाल खड़े हुए

Updated on 06-11-2024 02:35 PM

              ( संजय रायजादा ) 

            मध्यप्रदेश के राज्य मंत्रालय में स्थित लोक निर्माण विभाग के प्रशासनिक कार्यालय में *बिना किसी नियुक्ति आदेश* के लीगल एक्सपर्ट की कुर्सी पर बैठाए गए दागी रिटायर एक्जीक्यूटिव इंजीनियर नईमुद्दीन सिद्दिकी को आखिरकार हटाना ही पड़ा। कानून की शिक्षा से कोसों दूर इस भ्रष्ट इंजीनियर को सिर्फ अनुभव के आधार पर कानूनी सलाहकार के रूप में गैरकानूनी तरीके से पिछले दरवाजे से पदस्थ करने का मुद्दा हमारी न्यूज वेबसाइट एस आर पत्रिका ने उजागर करके विभागीय मंत्री राकेश सिंह तक पहुंचाया था । मंत्री की नाराज़गी के बाद सिद्दीकी के पैरोकारों को अपने कदम पीछे खींचने पड़े।

        लेकिन सरकार की नाक के नीचे भ्रष्टाचार में महारथी इस दागी रिटायर इंजीनियर की यह अवैध नियुक्ति कई सवाल खड़े कर गई है।   पहला बड़ा सवाल यह है कि लोकायुक्त द्वारा रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए सिद्दीकी को वेतन भत्तों के बिना किसने  पदस्थ किया था और उन्हें अपना मेहनताना सरकारी खजाने की जगह कहां से मिलता ? 

     दूसरा सवाल यह है कि क्या कोई सरकारी अधिकारी  बिना किसी कानूनी योग्यता के सिर्फ अनुभव के आधार पर  विभिन्न अदालतों में विचाराधीन करीब 450 मामलों में किसी गैर शासकीय व्यक्ति को निजी स्तर पर पदस्थ कर सकता है?

      जबकि तीसरा सवाल यह है कि नियमों  के विपरित प्रशासकीय स्वीकृति लिए बिना सिद्दीकी की नियुक्ति क्यों की गई ?यह कुछ ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब जानना बेहद जरूरी है।

पहले सवाल का जवाब 

       विभागीय मंत्री राकेश सिंह ने विभाग को साफ सुथरा करने के लिए दो महिने पहले ही विभिन्न मामलों में  आरोपी बनाए जा चुके करीब दर्जन भर दागी इंजीनियरों को महत्वपूर्ण पदों से हटाया था । इसके बावजूद विभाग के " उपसचिव नियाज़ अहमद खान " ने रिश्वतखोरी के घोषित आरोपी  सिद्दीकी को व्यक्तिगत स्तर पराज्य मंत्रालय में पिछले दरवाजे से कुर्सी पर बैठाने  की हिमाकत कर डाली । खान ने सिद्दीकी की कोई विधिवत नियुक्ति नहीं की थी और इस गैरकानूनी नियुक्ति में कामकाज की एवज में विभाग की एक महत्वपूर्ण इकाई पर उनके वेतन भत्तों के बराबर राशि हर महिने भुगतान करने का मौखिक निर्देश थोपा दिया था।

दूसरे सवाल का जवाब 

            इस दागी इंजीनियर के पास कानून की कोई डिग्री नहीं है। इसके बाद भी सिर्फ विभागीय मामलों में अच्छी ड्राफ्टिंग कर लेना ही उनकी मुख्य  योग्यता मानी जा सकती है। इसी आधार पर उन्हें विचाराधीन अदालती मामलों के साथ  विभागीय जांच और गंभीर शिकायतों के प्रकरण का काम भी सौंपे जाने की योजना थी। रिटायर होने के बाद सिद्दीकी को 2022 में कई तरह के भ्रष्टाचार करने वाले तत्कालीन प्रोजेक्ट डायरेक्टर जी पी मेहरा ने एक कंसल्टेंसी एजेन्सी के जरिए ऐसे ही लीगल एडवाइजर के पद पर विभागीय मुख्यालय में एक साल की संविदा नियुक्ति दिलवाकर कमोबेश यही जिम्मेदारी सौंपी थी । इसके बाद दोनों ने विभिन्न पचड़ों में घिरे इंजीनियरों को ब्लैकमेल करके खूब कमाई की थी। मतलब साफ है कि इस बार भी पर्दे के पीछे यही खेल दोहराने का ताना-बाना बुना गया था।

तीसरे सवाल का जवाब 

        एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी होने के बावजूद उपसचिव खान ने स्वजातीय व्यक्ति को लाभान्वित करने के लिए जानबूझकर सरकार में संविदा नियुक्ति के लिए प्रशासकीय स्वीकृति लेने के नियम का उल्लंघन किया। खान ने सिद्दीकी के खिलाफ भोपाल जिला अदालत में विचाराधीन रिश्वतखोरी के लोकायुक्त मुकदमे की जानकारी विभाग में अपर मुख्य सचिव स्तर के प्रमुख सचिव के सी गुप्ता को भी नहीं दी। बल्कि उनसे सिद्दीकी की अनुभवी दक्षता का बखान करके अदालतों में चल रहे मुक़दमों में सिद्दीकी की अवैतनिक मदद मिलने का सब्जबाग दिखाकर धर्म-भाई को कुर्सी पर बैठा दिया।

              दरअसल सनातन धर्म की खूबियों पर आधा दर्जन किताबें लिख चुके खान लंबी नौकरी के बाद भी 

प्रशासनिक दक्षता में कमजोर बताए जाते हैं। उनके इर्द-गिर्द रहने वाले विभागीय अधिकारियों के मुताबिक खान  लंबित कानूनी मसलों और विभागीय जांच, गंभीर शिकायतों पर कार्रवाई करने के मामलों में कम  कुशल हैं । उन्हें सारगर्भित संक्षिप्त नोटशीट लिखने में काफी मेहनत करनी पड़ती है।

    इसके चलते वे ऐसे मामलों से जुड़ी फाइलें निपटाने की  जगह "चर्चा करें" की टीप के साथ वापस भेज देते हैं। फिर दागी रिटायर इंजीनियर सिद्दीकी के जरिए इन मामलों से जुड़े लोगों से चर्चा करते है। खान लोक निर्माण विभाग में अपनी पदस्थापना के बाद से ही निजी स्तर पर गैर शासकीय व्यक्ति दागी इंजीनियर सिद्दीकी की मदद लेते आ रहे हैं। 

      इसी मदद और एक मजहब के चलते उन्होंने अपनी बिरादरी के व्यक्ति को गैर कानूनी रूप से उपकृत करने की कोशिश की थी जो हमारे प्रयास से अंततः असफल हो गई। खुद को मुस्लिम विरोधी ठहराने वाले खान साहब का  एक धर्म विशेष के व्यक्ति के लिए किया गया यह कृत्य कदाचरण की श्रेणी में आता है जिसके लिए उनके खिलाफ सरकार को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए अन्यथा वे भविष्य में भी ऐसे गुल खिला सकते हैं।


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