बंगाल में आधी रात से लागू हुआ गुंडा दमन कानून, शुभेंदु अधिकारी बोले- सज्जनों के लिए नहीं Anti-Social Activities Act

Updated on 13-07-2026 01:24 PM
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार, असामाजिक और उपद्रवी गतिविधियों को रोकने के लिए बनाया गया कानून 'पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण अधिनियम, 2026' सोमवार आधी रात से लागू हो गया है। पश्चिम बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026 को 29 जून को विधानसभा में पेश किया गया था। यह बिल पास हुआ और गवर्नर आर. एन. रवि की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन गया है। यह कानून राज्य में भ्रष्टाचार, असामाजिक और उपद्रवी गतिविधियों को रोकने के लिए पुलिस और सामान्य प्रशासन को सख्त कार्रवाई करने की ज्यादा शक्ति देता है, क्योंकि इस कानून में अपराधियों के लिए सख्त सजा और जुर्माने के प्रावधान हैं।

इस कानून के लागू होने के बाद अब अगर किसी व्यक्ति को जनता की सुरक्षा के लिए खतरा माना जाता है, तो उसे एक साल तक के लिए प्रिवेंटिव डिटेंशन (एहतियाती हिरासत) में रखने की अनुमति रहेगी।

संपत्ति जब्त करने का मिला अधिकार

वहीं, इस कानून के लागू हो जाने से राज्य सरकार को यह शक्ति मिल गई है कि वह बीएनएस के उचित प्रावधानों का इस्तेमाल करके ऐसे अपराध में शामिल व्यक्ति की संपत्ति जब्त कर सके। नए कानून के तहत पुलिस को यह अधिकार भी मिलेगा कि अगर उन्हें शक हो कि कोई व्यक्ति अशांति फैला सकता है, तो वे उसे किसी खास इलाके से बाहर निकाल सकते हैं या वहां आने से रोक सकते हैं। साथ ही, इस कानून को लागू करने में शामिल पुलिसकर्मियों और सरकारी कर्मचारियों को सुरक्षा भी दी जाएगी।

इसको लेकर विपक्षी दलों और समाज के एक वर्ग ने इस प्रावधान को कठोर बताया है और तर्क दिया है कि इससे पुलिस को अपनी 'मर्जी' से किसी को भी हिरासत में लेने की खुली छूट मिल जाएगी और इस तरह यह विपक्ष या आलोचना करने वाली आवाजों को दबाने में प्रभावी हो सकता है।

सलाहकार बोर्ड बनेगा

भाजपा की ओर से इसके जवाब में तर्क दिया गया कि प्रिवेंटिव डिटेंशन तभी प्रभावी होगा जब उचित और विस्तृत प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। इस प्रिवेंटिव डिटेंशन प्रावधान को लागू करने के लिए एक सलाहकार बोर्ड बनाया जाएगा जो यह तय करेगा कि किसी खास व्यक्ति के मामले में ऐसी हिरासत उचित है या नहीं।

सलाहकार बोर्ड प्रिवेंटिव डिटेंशन की उचितता का आकलन करेगा। हिरासत में लिए गए व्यक्ति को बोर्ड के सामने अपना बचाव करने के लिए एक प्रतिनिधि नियुक्त करने का अधिकार होगा। बोर्ड की अध्यक्षता कलकत्ता हाई कोर्ट के मौजूदा या पूर्व जज करेंगे। इसमें दो अन्य सदस्य भी होंगे जो हाई कोर्ट के जज बनने की योग्यता रखते हों।

सीएम बोले- सज्जन लोगों के लिए नहीं यह कानून

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने खुद प्रिवेंटिव डिटेंशन को लेकर जताई जा रही आशंकाओं को दूर किया और कहा कि यह प्रावधान 'सज्जन लोगों' के लिए नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए है जिनका आपराधिक इतिहास रहा हो। नए कानून में 'एक्सटर्नमेंट ऑर्डर' (इलाके से बाहर निकालने का आदेश) का भी प्रावधान है। अगर कोई डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट या सुपरिटेंडेंट या उससे ऊंचे पद का पुलिस अधिकारी यह तय करता है कि कोई (व्यक्ति, खासकर कोई जाना-माना अपराधी या उपद्रवी) किसी खास जगह पर अशांति फैला सकता है, तो उन्हें उस व्यक्ति को उस इलाके या पूरे जिले से एक साल तक के लिए बाहर निकालने का आदेश देने का अधिकार होगा।

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